प्रभात न्यूज़ 24:
कंजी में ‘कबीर मेडिकल’ की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, बच्चों के इलाज को लेकर जांच की मांग
मंत्री टंक राम वर्मा के पीए से अच्छे संबंध और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल से नजदीकी
का दावा;
स्वास्थ्य विभाग ने कहा—प्रैक्टिस की शिकायत पर नर्सिंग होम एक्ट के तहत होती है कार्रवाई
सुबह 6 से 10 और शाम 4 से 10 बजे तक खुलने वाले मेडिकल में इलाज को लेकर सवाल, संचालक के कथित रसूख के दावों की निष्पक्ष जांच जरूरी; स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और आधिकारिक पक्ष का इंतजार
प्रभात न्यूज़ 24 | बलौदाबाजार-भाटापारा।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिला मुख्यालय से लगे ग्राम कंजी में संचालित बताए जा रहे ‘कबीर मेडिकल’ की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मेडिकल की आड़ में मरीजों का इलाज किए जाने, विशेषकर छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कथित तौर पर खिलवाड़ होने की शिकायतों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले को लेकर सामने आए कथित बयानों में संबंधित व्यक्ति द्वारा प्रदेश के मंत्री टंक राम वर्मा के निजी सहायक (पीए) से अच्छे संबंध होने, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल से घनिष्ठता होने तथा क्षेत्रीय मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अपना क्लिनिक संचालित होने का दावा किए जाने की बात कही जा रही है। इतना ही नहीं, बलौदाबाजार के एक प्रतिष्ठित संस्थान के संचालक डॉक्टर के.के. साहू का नाम लेकर भी कथित तौर पर कहा गया कि वे भी उसका कुछ नहीं कर सके।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। लेकिन जो झोलाछाप डॉक्टर है वह अपने मुंह से स्वयं बोल रहा है कि मैं गौरीशंकर भैया से फोन लगाया था मंत्री टंक राम वर्मा का सहयोग मिलता है क्या इन्हीं सब कारणों से उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है या मामला कुछ और ही है यह सभी एक जांच का विषय है ,, किंतु किसी जनप्रतिनिधि, मंत्री, उनके निजी सहायक अथवा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की संलिप्तता या संरक्षण को लेकर फिलहाल कोई प्रमाणित निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
क्या मेडिकल की आड़ में चल रहा है इलाज?
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम कंजी में ‘कबीर मेडिकल’ नाम से एक प्रतिष्ठान संचालित है। यहां खुलने का समय सुबह 6 बजे से 10 बजे तक तथा शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि इस प्रतिष्ठान में लंबे समय से छोटे बच्चों सहित अन्य मरीजों का इलाज किया जा रहा है। छोटे बच्चों को भारती रखकर बोतल ट्रिप भी लगाए जाने की पुष्टि हुई है।
यदि मेडिकल स्टोर की आड़ में कोई व्यक्ति बिना आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता, पंजीयन अथवा वैधानिक अनुमति के मरीजों का उपचार कर रहा है, तो यह गंभीर जांच का विषय है। खासकर बच्चों के मामले में गलत दवा, अनुचित खुराक, बीमारी की गलत पहचान या समय पर उचित अस्पताल नहीं पहुंचाए जाने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, कबीर मेडिकल में लाइसेंस किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से है और वहां बैठकर कोई दूसरा व्यक्ति इलाज भी कर रहा है,किस प्रकार का उपचार किया जा रहा है, वहां कौन-कौन सी चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध हैं, उपचार करने वाले व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता क्या है और उसके पास आवश्यक पंजीयन अथवा अनुमति है या नहीं—इन सभी बिंदुओं की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों एवं विभागीय जांच से ही हो सकती है।
यही वजह है कि मामले को केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
मंत्री के पीए और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष से नजदीकी का कथित दावा चर्चा में
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू संबंधित व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर अपने राजनीतिक संपर्कों का उल्लेख किया जाना है। सामने आई जानकारी के अनुसार, उसने मंत्री टंक राम वर्मा के पीए से अच्छे संबंध होने और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल से घनिष्ठता होने की बात कही।
इसके साथ ही कथित तौर पर यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय मंत्री और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से उसका क्लिनिक चलता है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा वास्तव में इस तरह के दावे किए जा रहे हैं, तो यह जांच का विषय है कि इन कथनों के पीछे वास्तविकता क्या है और क्या संबंधित व्यक्ति अपने संपर्कों का हवाला देकर किसी प्रकार की कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहा है।
यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि किसी जनप्रतिनिधि या उनके कार्यालय से परिचय होना अपने आप में किसी गलत गतिविधि में संरक्षण का प्रमाण नहीं है। इसलिए इन कथित बयानों के आधार पर किसी जनप्रतिनिधि की भूमिका को दोषपूर्ण मानना उचित नहीं होगा।
लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपने कथित राजनीतिक संबंधों का हवाला देकर कानून से ऊपर होने का संदेश देता है, तो प्रशासन को ऐसे दावों की वास्तविकता की जांच कर आम जनता के बीच स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
‘मैं अकेला नहीं, जिले में और भी लोग हैं’—कथित बयान ने बढ़ाए सवाल
मामले में सामने आए कथित बयान के अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने यह भी कहा कि वह अकेला ऐसा व्यक्ति नहीं है जो इलाज करता है, बल्कि जिले में और भी कई लोग इस तरह का काम कर रहे हैं। कथित तौर पर उसने यह भी कहा कि आगे जो होगा, देखा जाएगा।
यदि यह बयान सही है, तो इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या जिले में ऐसे अन्य प्रतिष्ठान भी संचालित हैं, जहां आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता या वैधानिक अनुमति के बिना मरीजों का उपचार किया जा रहा है?
हालांकि, किसी एक व्यक्ति के कथित बयान के आधार पर जिले में अन्य लोगों द्वारा अवैध चिकित्सा किए जाने की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को शिकायतों, पंजीयन संबंधी दस्तावेजों और क्षेत्रीय निरीक्षण के आधार पर जांच करनी होगी।
यदि जांच में अन्य स्थानों पर भी अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रतिष्ठित डॉक्टर का नाम लेकर भी कथित तौर पर कही गई बात
इस प्रकरण में बलौदाबाजार के एक प्रतिष्ठित संस्थान के संचालक डॉक्टर के.के. साहू का नाम भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने कथित तौर पर दावा किया कि डॉक्टर के.के. साहू भी उसका कुछ नहीं कर सके।
इस कथित बयान की परिस्थितियों और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। डॉक्टर के.के. साहू की इस मामले में क्या भूमिका है, क्या उन्होंने कभी कोई शिकायत की थी अथवा संबंधित व्यक्ति के साथ उनका कोई विवाद रहा है—इन सवालों का जवाब संबंधित पक्षों के आधिकारिक वक्तव्य और उपलब्ध दस्तावेजों से ही मिल सकता है।
बिना पुष्टि किसी व्यक्ति के नाम को किसी कथित अनियमितता से जोड़ना उचित नहीं होगा। इसलिए इस पहलू पर भी संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग से चर्चा, नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई की बात
मामले के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से चर्चा किए जाने पर उन्होंने कथित रूप से कहा कि यदि कोई व्यक्ति चिकित्सा प्रैक्टिस करता है, तो उसके विरुद्ध नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल की जांच बाद में की जाती है और फिलहाल वे दूसरे कार्यों में व्यस्त हैं।
अधिकारी के कथित जवाब के अनुसार, उन्होंने इस विषय में बाइट देने का अधिकार नहीं होने की बात कही और कहा कि एडीसी सर के आने पर उनसे बाइट ली जाए।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सामने आए इस जवाब के बाद अब यह सवाल उठता है कि ग्राम कंजी स्थित कबीर मेडिकल की जांच आखिर कब की जाएगी? क्या विभाग को इस प्रतिष्ठान के संचालन और वहां मरीजों के उपचार की जानकारी पहले से है? यदि शिकायत प्राप्त हुई है, तो उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
इन सवालों पर विभाग की ओर से स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है।
यह भी उल्लेखनीय है कि अधिकारी द्वारा कथित रूप से नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई की बात कहे जाने का अर्थ यह नहीं है कि इस विशेष मामले में कोई उल्लंघन प्रमाणित हो चुका है। इसके लिए संबंधित प्रतिष्ठान की प्रकृति, वहां संचालित गतिविधियों और लागू कानूनी प्रावधानों की जांच जरूरी है।
मेडिकल स्टोर और क्लिनिक में अंतर की जांच जरूरी
किसी मेडिकल स्टोर का संचालन और मरीजों का चिकित्सकीय परीक्षण कर उपचार करना अलग-अलग गतिविधियां हैं। किसी प्रतिष्ठान पर दवाइयां उपलब्ध होने मात्र से वहां चिकित्सकीय उपचार की अनुमति स्वतः प्राप्त नहीं हो जाती।
इसी तरह, किसी प्रतिष्ठान के नाम में ‘मेडिकल’ शब्द होने से यह निष्कर्ष भी नहीं निकाला जा सकता कि वहां अवैध उपचार हो रहा है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए यह देखना आवश्यक है कि वहां कौन-सी गतिविधियां संचालित हो रही हैं, दवाइयों की बिक्री के लिए आवश्यक लाइसेंस है या नहीं और मरीजों का परीक्षण अथवा उपचार कौन कर रहा है।
यदि वहां चिकित्सकीय परामर्श, जांच, दवा लिखने या उपचार की गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो संबंधित व्यक्ति की योग्यता, पंजीयन और प्रतिष्ठान पर लागू नियमों की जांच की जानी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित प्रतिष्ठान किस श्रेणी में आता है तथा उस पर कौन-कौन से नियम लागू होते हैं।
बच्चों के स्वास्थ्य का सवाल, जिम्मेदारी से नहीं हो सकता समझौता
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बच्चों के उपचार से जुड़ा आरोप है। छोटे बच्चों में बीमारी के लक्षणों की सही पहचान, उम्र और वजन के अनुसार दवा की खुराक तथा समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
यदि कोई अयोग्य व्यक्ति बच्चों का उपचार कर रहा है, तो इससे उनके स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका हो सकती है। वहीं, यदि संबंधित व्यक्ति के पास आवश्यक योग्यता और वैधानिक अनुमति है, तो उसे भी अपना पक्ष रखने और तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
इसलिए जरूरी है कि स्वास्थ्य विभाग बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के जांच करे। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि वहां बच्चों का उपचार किया जा रहा है या नहीं, किस प्रकार की दवाइयां दी जा रही हैं, उपचार करने वाले व्यक्ति की योग्यता क्या है और क्या समस्त गतिविधियां नियमों के अनुरूप हैं।
यदि किसी बच्चे को गलत उपचार से नुकसान पहुंचने की शिकायत मिलती है, तो उसकी भी नियमानुसार जांच की जानी चाहिए।
प्रशासन के सामने ये प्रमुख सवाल
ग्राम कंजी के कबीर मेडिकल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से निम्न बिंदुओं पर स्पष्टता अपेक्षित है—
क्या कबीर मेडिकल के पास दवाइयों की बिक्री के लिए वैध औषधि लाइसेंस है?
क्या वहां मरीजों का चिकित्सकीय परीक्षण और उपचार किया जाता है?
उपचार करने वाले व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता और चिकित्सकीय पंजीयन क्या है?
क्या संबंधित प्रतिष्ठान पर क्लिनिक अथवा नर्सिंग होम से जुड़े नियम लागू होते हैं?
क्या स्वास्थ्य विभाग ने पूर्व में इस प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया है?
क्या बच्चों के उपचार को लेकर विभाग को कोई लिखित शिकायत प्राप्त हुई है?
यदि शिकायत प्राप्त हुई है, तो उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
संबंधित व्यक्ति द्वारा मंत्री के पीए, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से संबंध होने के कथित दावों की वास्तविकता क्या है?
क्या जिले में इसी प्रकार की अन्य शिकायतों की जांच के लिए कोई अभियान चलाया जा रहा है?
क्या विभाग जांच के निष्कर्षों और की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करेगा?
इन सवालों का जवाब सामने आने से न केवल कंजी के इस प्रतिष्ठान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि जिले में चिकित्सा सेवाओं की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी तस्वीर साफ हो सकेगी।
रसूख के दावों से नहीं, नियमों और जांच से तय होनी चाहिए सच्चाई
किसी भी व्यक्ति के राजनीतिक या सामाजिक संपर्क उसकी योग्यता, पंजीयन और कानूनी जिम्मेदारियों का विकल्प नहीं हो सकते। यदि कोई प्रतिष्ठान नियमों के अनुरूप संचालित हो रहा है, तो जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए। वहीं, यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति के प्रभाव अथवा संपर्कों से अलग हटकर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस मामले में कथित राजनीतिक संपर्कों के दावों की पुष्टि अभी शेष है। इसलिए इन दावों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय जांच के एक बिंदु के रूप में देखा जाना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि वह शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक दस्तावेजों की जांच करे, मौके का निरीक्षण करे और नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करे।
अब विभागीय जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार
ग्राम कंजी में संचालित बताए जा रहे कबीर मेडिकल को लेकर सामने आए आरोपों और कथित बयानों ने कई सवाल खड़े किए हैं। एक ओर बच्चों के उपचार को लेकर गंभीर शिकायतें हैं, तो दूसरी ओर संबंधित व्यक्ति द्वारा कथित राजनीतिक संपर्कों का हवाला दिए जाने की बात सामने आ रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कब निरीक्षण करता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं। क्या प्रतिष्ठान की गतिविधियां नियमों के अनुरूप पाई जाती हैं या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है—इसका निर्णय केवल निष्पक्ष जांच और प्रमाणों के आधार पर ही हो सकता है।
प्रभात न्यूज़ 24 इस मामले में संबंधित व्यक्ति, मंत्री टंक राम वर्मा के कार्यालय, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, डॉक्टर के.के. साहू तथा स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
नोट: इस समाचार में वर्णित आरोपों एवं कथित बयानों की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना शेष है। समाचार का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य, चिकित्सा संबंधी नियमों के पालन और जनहित से जुड़े सवालों को संबंधित विभाग के संज्ञान में लाना है। किसी व्यक्ति अथवा जनप्रतिनिधि के विरुद्ध आरोप को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना इसका उद्देश्य नहीं है।
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