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स्कूल में घुसकर प्राचार्य से अभद्रता के आरोप से उठे कई सवाल प्राचार्य ने आशीष शुक्ला सहित अन्य के खिलाफ कोतवाली में दिया आवेदन, जबरन प्रवेश, वीडियो बनाने और नारेबाजी के लगाए आरोप; पुलिस ने कहा—जांच के बाद होगी विधि सम्मत कार्रवाई

क्राइम 20 September 2026 (334)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

स्कूल में घुसकर प्राचार्य से अभद्रता के आरोप से उठे कई सवाल


प्राचार्य ने आशीष शुक्ला सहित अन्य के खिलाफ कोतवाली में दिया आवेदन, जबरन प्रवेश, वीडियो बनाने और नारेबाजी के लगाए आरोप; पुलिस ने कहा—जांच के बाद होगी विधि सम्मत कार्रवाई



बलौदाबाजार। 

शहर के एक प्रतिष्ठित शासकीय विद्यालय में 17 सितंबर की शाम सामने आए कथित घटनाक्रम ने न केवल विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई और शिकायतों के निपटारे को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।



विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य वंदनी श्रीवास्तव ने सिटी कोतवाली में आवेदन देकर आशीष शुक्ला सहित अन्य लोगों पर बिना अनुमति कार्यालय में प्रवेश करने, अभद्र व्यवहार करने, जबरन वीडियो बनाने, नारेबाजी करने तथा शासकीय कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया है। 


प्राचार्य ने पूरे मामले की जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई और अपनी सुरक्षा की मांग की है।



बंद कार्यालय में प्रवेश और वीडियो बनाने का आरोप

प्राचार्य द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार 17 सितंबर की शाम करीब 4.30 बजे विद्यालय में सेवा संकल्प कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान वह अपने कार्यालय में विद्यार्थियों एवं अन्य लोगों के साथ एक शिकायत के संबंध में चर्चा कर रही थीं।

शिकायत के मुताबिक इसी दौरान आशीष शुक्ला कुछ लोगों के साथ कथित रूप से कार्यालय में प्रवेश कर गया। प्राचार्य का आरोप है कि उन्होंने बाहर जाने के लिए कहा, लेकिन इसके बावजूद वहां मौजूद लोगों द्वारा नारेबाजी की गई तथा मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग जारी रखी गई।

प्राचार्य ने यह भी कहा है कि कार्यालय के आसपास नाबालिग छात्र-छात्राएं मौजूद थे और उन्होंने बाहरी लोगों द्वारा बिना अनुमति वीडियो बनाए जाने का विरोध किया। शिकायत के अनुसार रिकॉर्डिंग रोकने का प्रयास करने पर उनके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया।

मामले को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। हालांकि वीडियो की वास्तविकता, उसमें मौजूद लोगों और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।



प्राचार्य का दावा—पहले भी स्कूल पहुंचकर बनाए गए वीडियो

प्राचार्य ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि इससे पहले भी आशीष शुक्ला द्वारा विद्यालय परिसर में पहुंचकर उनके वीडियो बनाए गए और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।

प्राचार्य का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियों से उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा विद्यालय की गरिमा एवं कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका है।



अब सामने आया पुलिस रिकॉर्ड और पुरानी शिकायतों का सवाल

प्राचार्य के आवेदन में आशीष शुक्ला के खिलाफ पूर्व में पुलिस स्तर पर की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है। आवेदन के अनुसार 7 नवंबर 2025 को सिटी कोतवाली पुलिस द्वारा जिला प्रशासन को इस्तगासा भेजा गया था, जिसमें पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर उसके खिलाफ पूर्व में दर्ज मामलों का उल्लेख किया गया था। शिकायत में 19 अगस्त 2026 को भी जिला प्रशासन को कार्रवाई के लिए इस्तगासा भेजे जाने की बात कही गई है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध दर्ज होना अथवा पुलिस द्वारा कोई प्रस्ताव/इस्तगासा भेजा जाना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी सिद्ध नहीं करता। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकलता है।



'गुंडा सूची' में नाम होने की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि जरूरी

शहर में यह चर्चा भी सामने आती रही है कि संबंधित व्यक्ति का नाम पुलिस की कथित गुंडा सूची/निगरानी सूची में शामिल है। यदि यह तथ्य आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड से प्रमाणित होता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि ऐसे व्यक्ति की गतिविधियों की पुलिस द्वारा किस स्तर पर निगरानी की जा रही है।

लेकिन इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि वर्तमान में उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। पुलिस विभाग द्वारा रिकॉर्ड सार्वजनिक अथवा आधिकारिक रूप से उपलब्ध कराए जाने पर ही इस बिंदु पर स्पष्ट स्थिति सामने आ सकती है।



थाने और सरकारी दफ्तरों में आने-जाने को लेकर भी सवाल

शहर में यह चर्चा भी है कि संबंधित व्यक्ति को कई सरकारी कार्यालयों में नियमित रूप से आते-जाते देखा जाता है। कुछ लोगों का दावा है कि वह पुलिस थाने में भी अक्सर दिखाई देता है।

यदि किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में पुलिस रिकॉर्ड में निगरानी अथवा पूर्व प्रकरण दर्ज हैं, तो उसके थाने या अन्य सरकारी कार्यालयों में आने-जाने की प्रकृति क्या है, वह किस उद्देश्य से वहां पहुंचता है और अधिकारियों से उसकी मुलाकात किस संदर्भ में होती है—ये सभी तथ्य जांच के विषय हो सकते हैं।

हालांकि केवल किसी व्यक्ति का किसी सरकारी कार्यालय में दिखाई देना अपने आप में किसी अनुचित गतिविधि का प्रमाण नहीं है। इसलिए इस संबंध में भी आधिकारिक स्पष्टीकरण आवश्यक है।



तहसील कार्यालय से जुड़ी प्रक्रिया की भी चर्चा

सूत्रों के हवाले से यह जानकारी भी सामने आ रही है कि संबंधित व्यक्ति के संबंध में बलौदाबाजार तहसील कार्यालय स्तर पर दो मामलों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया चलने की चर्चा है।

इसकी भी आधिकारिक दस्तावेजों अथवा सक्षम अधिकारी से पुष्टि होना आवश्यक है। यदि ऐसी कोई प्रक्रिया वास्तव में लंबित है, तो उसके कारण और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक होने से मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।



पुलिस का पक्ष—'आवेदन मिला है, जांच के बाद होगी कार्रवाई'

मामले को लेकर जब बलौदाबाजार थाना प्रभारी से फोन पर चर्चा की गई तो उनका कहना था कि प्राचार्य का आवेदन प्राप्त हुआ है और जांच के उपरांत विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

जब पूर्व में दिए गए अन्य आवेदनों और शिकायतों के संबंध में सवाल किया गया तो थाना प्रभारी की ओर से बताया गया कि संबंधित मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है।

हालांकि दूसरी ओर कुछ शिकायतकर्ताओं से बातचीत करने पर उनका कहना है कि उन्हें कथित कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस पूर्व शिकायतों में हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड स्पष्ट करे, ताकि शिकायतकर्ताओं और आम जनता के बीच बनी असमंजस की स्थिति दूर हो सके।



सबसे बड़ा सवाल—शिकायतों पर कार्रवाई कितनी पारदर्शी?

पूरे मामले में अब कई सवाल जनता के बीच चर्चा का विषय बन रहे हैं—

क्या संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पूर्व में दर्ज मामलों और पुलिस कार्रवाई का रिकॉर्ड क्या है?

क्या उसका नाम वास्तव में किसी निगरानी अथवा गुंडा सूची में दर्ज है?

यदि दर्ज है तो वर्तमान में उसके संबंध में पुलिस की निगरानी व्यवस्था क्या है?

पूर्व में जिन लोगों ने उसके खिलाफ शिकायतें कीं, उन शिकायतों पर वास्तव में क्या कार्रवाई हुई?

क्या शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई की जानकारी दी गई?

सरकारी स्कूल परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश और नाबालिग विद्यार्थियों की वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर विद्यालय प्रशासन की शिकायत पर पुलिस किस तरह की कार्रवाई करती है?

और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—यदि पुलिस के पास किसी व्यक्ति के संबंध में पूर्व से आपराधिक रिकॉर्ड अथवा निगरानी संबंधी जानकारी मौजूद है, तो ऐसी स्थिति में उसके द्वारा सरकारी संस्थानों में पहुंचकर विवाद उत्पन्न करने की शिकायतों को किस गंभीरता से लिया जाता है?



अब पुलिस जांच पर टिकी नजर

फिलहाल प्राचार्य द्वारा दिया गया आवेदन पुलिस के पास पहुंच चुका है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के बाद विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस पूरे मामले में केवल वर्तमान घटना की जांच करती है या पूर्व में की गई शिकायतों और कार्रवाई के रिकॉर्ड को भी सामने लाती है।

प्रभात न्यूज़ 24 इस मामले में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रहा है। समाचार में उल्लेखित आरोप संबंधित प्राचार्य की शिकायत, उपलब्ध जानकारी और संबंधित पक्षों के कथनों पर आधारित हैं। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसी अथवा न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही माना जा सकता है।

जनता के हित में हमारा सवाल सिर्फ इतना है कि शिकायत चाहे किसी प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ हो या सामान्य नागरिक के—पुलिस कार्रवाई पारदर्शी, निष्पक्ष और रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए।

इस मामले में पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर प्रभात न्यूज़ 24 की नजर बनी रहेगी। आधिकारिक रूप से कोई नया तथ्य, कार्रवाई या दस्तावेज सामने आने पर उसे भी पाठकों के समक्ष रखा जाएगा।

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