Breaking

39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का था मामला, बचाव पक्ष ने पुलिस की तलाशी-जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कसडोल थाने का CCTV फुटेज पेश नहीं होने और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में उठे महत्वपूर्ण बिंदु

देश / दुनिया 25 September 2026 (20)

post

प्रभात न्यूज़ 24: 

39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त

स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का था मामला, बचाव पक्ष ने पुलिस की तलाशी-जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कसडोल थाने का CCTV फुटेज पेश नहीं होने और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में उठे महत्वपूर्ण बिंदु



बिलासपुर। 

39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) से संबंधित न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामला थाना कसडोल क्षेत्र में स्कॉर्पियो और जुपिटर वाहन से गांजा बरामद किए जाने से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष की ओर से बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया गया, वहीं बचाव पक्ष ने तलाशी, जब्ती और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।



न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा पुलिस द्वारा अपनाई गई कार्रवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया गया। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभियोजन को कानून के अनुरूप की गई तलाशी एवं जब्ती तथा उससे जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से स्थापित करना आवश्यक है।

स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का दावा

प्रकरण के अनुसार पुलिस कार्रवाई के दौरान स्कॉर्पियो तथा जुपिटर वाहन से कुल 39.770 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। बरामदगी के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध NDPS अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी।



मामला न्यायालय पहुंचने के बाद अभियोजन की ओर से पुलिस अधिकारियों एवं अन्य संबंधित गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन का उद्देश्य यह साबित करना था कि बरामद मादक पदार्थ आरोपियों के कब्जे से मिला था और पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई थी।

हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि मामले में तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाईं।



कसडोल थाना परिसर का CCTV फुटेज नहीं हो सका पेश

मामले की सुनवाई के दौरान थाना कसडोल के CCTV फुटेज को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए CCTV फुटेज का मुद्दा उठाया गया।

बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि संबंधित समय का CCTV फुटेज उपलब्ध था, तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, ताकि पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और आरोपियों को थाने लाए जाने अथवा कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

लेकिन सुनवाई के दौरान संबंधित CCTV फुटेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका। बचाव पक्ष ने इसी बिंदु को अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा।



तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

NDPS मामलों में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। इसी को आधार बनाते हुए बचाव पक्ष ने मामले में अपनाई गई तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मादक पदार्थ की बरामदगी का दावा करने के साथ-साथ अभियोजन को यह भी स्पष्ट करना होता है कि तलाशी और जब्ती किस परिस्थिति में हुई, कौन-कौन लोग मौजूद थे, बरामदगी की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई तथा जब्त सामग्री को सुरक्षित रखने और आगे भेजने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई।

बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जहां अभियोजन की कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्वतंत्र एवं ठोस पुष्टि नहीं हो पाती, वहां केवल पुलिस दस्तावेजों के आधार पर आरोप को संदेह से परे साबित मानना उचित नहीं होगा।

अभियोजन के साक्ष्यों पर न्यायालय ने किया विचार

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए आपत्तियों पर विचार किया। आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है।



इस मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुसार संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका।



इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय दिया।

रामनाथ पटेल को मिली जमानत

प्रकरण में आरोपी रामनाथ पटेल को न्यायालय से जमानत भी मिली। न्यायालय के आदेश के बाद मामले में आरोपियों को राहत प्राप्त हुई।

यह फैसला NDPS मामलों में पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है।

बचाव पक्ष ने कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठाए सवाल

बचाव पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र चंद्राकर ने मामले में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक मामले में बरामदगी की कहानी के साथ-साथ कार्रवाई की प्रत्येक महत्वपूर्ण कड़ी का विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से स्थापित होना जरूरी है।



अधिवक्ता चंद्राकर के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने, तलाशी-जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं तथा अन्य परिस्थितियों के कारण अभियोजन की कहानी को संदेह से परे स्थापित करने में कठिनाई रही।

उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त किया है।



NDPS मामलों में प्रक्रिया का महत्व

कानूनी जानकारों के अनुसार NDPS अधिनियम से जुड़े मामलों में मादक पदार्थ की बरामदगी जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी तलाशी, जब्ती, सीलिंग, सुरक्षित अभिरक्षा और साक्ष्य की निरंतरता से जुड़ी प्रक्रिया भी होती है।

यदि अभियोजन किसी मामले में आरोप सिद्ध करना चाहता है तो उसे बरामदगी की परिस्थितियों के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य की विश्वसनीयता भी न्यायालय के समक्ष स्थापित करनी होती है।

इस मामले में न्यायालय के समक्ष इन्हीं प्रक्रियात्मक एवं साक्ष्य संबंधी पहलुओं पर बचाव पक्ष ने जोर दिया। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं माना जा सकता।



न्यायालय के फैसले से सामने आया महत्वपूर्ण कानूनी पहलू

39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी जैसे गंभीर आरोप वाले मामले में आरोपियों का दोषमुक्त होना न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की भूमिका को रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाया गया आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, आपराधिक न्याय व्यवस्था में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को निर्धारित कानूनी कसौटी पर साक्ष्य प्रस्तुत करना होता है।

इस प्रकरण में न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं पाया। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।



फैसला पुलिस कार्रवाई पर भी महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया

इस मामले का फैसला केवल आरोपियों को मिली राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जांच और अभियोजन की प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाता है। विशेषकर ऐसे मामलों में जहां बरामदगी को मुकदमे का मुख्य आधार बनाया जाता है, वहां तलाशी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।



कसडोल थाना परिसर के CCTV फुटेज का न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हो पाना भी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों का हिस्सा बना। इसके अलावा तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर भी न्यायालय ने विचार किया।



आरोप सिद्ध नहीं होने पर मिला दोषमुक्ति का लाभ

अंततः न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया गया।



मामले में रामनाथ पटेल को जमानत मिलने से उन्हें भी न्यायिक राहत मिली है।

यह खबर न्यायालय के निर्णय, उपलब्ध मामले की जानकारी और बचाव पक्ष की ओर से रखे गए तर्कों पर आधारित है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को यहां अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद संबंधित आरोपों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

You might also like!


RAIPUR WEATHER