प्रभात न्यूज़ 24:
सागर की शराब त्रासदी से सबक: छत्तीसगढ़ में भी अवैध शराब के खिलाफ सख्ती जरूरी
मध्यप्रदेश में जहरीली शराब से मौतों ने बढ़ाई चिंता, छत्तीसगढ़ में भी अवैध शराब के कारोबार पर उठ रहे सवाल; जागरूकता और सख्त निगरानी समय की मांग
बलौदाबाजार।
पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। बंडा क्षेत्र में शराब सेवन के बाद बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने और कई लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है। प्रभावित क्षेत्र में शराब दुकानों को सील करने, सैंपल जांच के लिए भेजने और लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग जैसी कार्रवाई की गई है।
सागर की यह घटना केवल मध्यप्रदेश के लिए चेतावनी नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ सहित उन सभी राज्यों के लिए गंभीर सबक है जहां अवैध शराब, कच्ची शराब, मिलावटी शराब अथवा नियमों के विपरीत शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
छत्तीसगढ़ में भी सामने आ रहे अवैध शराब के मामले
छत्तीसगढ़ में भी समय-समय पर अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के मामले सामने आते रहे हैं। हाल के दिनों में कांकेर के भानुप्रतापपुर में बड़ी संख्या में खाली शराब बोतलें, ढक्कन, स्टीकर और होलोग्राम मिलने की खबर ने शराब में संभावित मिलावट और अवैध कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इसी तरह प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अवैध महुआ शराब के खिलाफ कार्रवाई में बड़ी मात्रा में शराब जब्त की गई है। धमतरी में पुलिस ने 210 लीटर अवैध महुआ शराब जब्त कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
बलौदाबाजार जिले में भी शराब दुकानों में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बिक्री का मामला सामने आया, जिसके बाद संबंधित विक्रेता पर प्रकरण दर्ज करने के साथ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की गई।
असली चिंता सिर्फ अवैध बिक्री नहीं, लोगों की जान भी है
शराब की अवैध बिक्री को केवल कानून-व्यवस्था अथवा राजस्व का विषय मानना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य और मानव जीवन जुड़ा हुआ है।
अवैध तरीके से तैयार की गई शराब में किस प्रकार का पदार्थ मिलाया गया है, उसकी मात्रा कितनी है और वह मानव शरीर के लिए कितनी घातक है—इसकी कोई विश्वसनीय गारंटी उपभोक्ता के पास नहीं होती।
यही वजह है कि मध्यप्रदेश के सागर की घटना को केवल एक स्थानीय घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
छत्तीसगढ़ में उठने चाहिए कुछ जरूरी सवाल
सागर की घटना के बाद छत्तीसगढ़ में भी प्रशासन और आबकारी विभाग को अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाने की जरूरत महसूस होती है।
क्या अवैध शराब के संभावित ठिकानों की नियमित पहचान हो रही है?
क्या ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी पर्याप्त है?
क्या शराब की दुकानों और उनके आसपास अवैध बिक्री पर लगातार नजर रखी जा रही है?
क्या संदिग्ध शराब की तत्काल जांच के लिए पर्याप्त व्यवस्था है?
क्या शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई का फॉलोअप भी किया जाता है?
इन सवालों का जवाब केवल प्रशासन के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
जन-जागरूकता सबसे बड़ा हथियार
शराब का सेवन करने वालों को यह समझना होगा कि सस्ती शराब के लालच में किसी अज्ञात व्यक्ति से शराब खरीदना जानलेवा साबित हो सकता है।
किसी भी व्यक्ति को यदि शराब की गुणवत्ता पर संदेह हो, बोतल की सील संदिग्ध लगे, पैकिंग में गड़बड़ी दिखाई दे या कोई व्यक्ति खुले तौर पर अवैध शराब बेचता नजर आए तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस अथवा आबकारी विभाग को दी जानी चाहिए।
साथ ही, शराब का सेवन न करना ही स्वास्थ्य और परिवार के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प है।
प्रशासन को भी ‘घटना के बाद कार्रवाई’ से आगे बढ़ना होगा
सागर की घटना से सबसे बड़ा सबक यही है कि प्रशासन को किसी बड़ी घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए। अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई नियमित, गोपनीय सूचना तंत्र आधारित और लगातार होनी चाहिए।
संदिग्ध स्थानों की पहचान, शराब के नमूनों की जांच, अवैध निर्माण स्थलों पर कार्रवाई, अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी और स्थानीय स्तर पर शिकायतों की त्वरित जांच जैसे कदमों को मजबूत किया जाना जरूरी है।
मध्यप्रदेश में घटना के बाद प्रशासन ने अवैध एवं अमानक शराब के खिलाफ त्रिस्तरीय रणनीति शुरू की है।
पड़ोसी राज्य की घटना को चेतावनी के रूप में लेने की जरूरत
मध्यप्रदेश के सागर में हुई त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध शराब का कारोबार केवल कानून तोड़ने का मामला नहीं है। यदि समय रहते इसकी रोकथाम नहीं की गई तो इसका परिणाम परिवारों के उजड़ने और निर्दोष लोगों की जान जाने के रूप में सामने आ सकता है।
छत्तीसगढ़ में भी अवैध शराब से जुड़े मामलों पर लगातार कार्रवाई हो रही है, लेकिन चुनौती की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक निगरानी के साथ जन-जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।
सवाल यह नहीं होना चाहिए कि कार्रवाई कितनी शराब जब्त होने के बाद शुरू हुई; सवाल यह होना चाहिए कि ऐसी शराब आम लोगों तक पहुंचने से पहले रोकी क्यों नहीं गई।
जनता से अपील
अवैध शराब न खरीदें, न बेचें और न ही किसी संदिग्ध शराब का सेवन करें।
यदि आसपास अवैध शराब की बिक्री या निर्माण की जानकारी हो तो संबंधित प्रशासनिक विभाग अथवा पुलिस को सूचना दें। एक छोटी-सी सूचना किसी परिवार को बड़ी त्रासदी से बचा सकती है।
सागर की घटना को चेतावनी मानें—नशे से दूरी और अवैध शराब के खिलाफ जागरूकता ही समाज की सुरक्षा का सबसे मजबूत रास्ता है।













