प्रभात न्यूज़ 24:
बलौदाबाजार में आबकारी विभाग की बदली तस्वीर!
अवैध शराब पर सख्त कार्रवाई के बीच पहली बार पूरी विभागीय टीम मैदान में दिखी, “प्राइवेट नेटवर्क” पर भी उठने लगे थे सवाल
बलौदाबाजार।
जिले में अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इस बार चर्चा केवल शराब और महुआ लाहन की जब्ती तक सीमित नहीं रही, बल्कि कार्रवाई के दौरान विभाग की पूरी टीम की सक्रिय मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। लंबे समय बाद आबकारी विभाग की कार्रवाई में बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मैदान में दिखाई दिए, जिसे क्षेत्र में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश एवं जिला आबकारी अधिकारी मुकेश अग्रवाल के नेतृत्व में पलारी, बलौदाबाजार और कसडोल क्षेत्र में लगातार कार्रवाई करते हुए करीब 23 हजार रुपये मूल्य का देशी मदिरा मसाला, हाथभट्ठी महुआ शराब एवं महुआ लाहन जब्त किया गया। विभाग ने अलग-अलग मामलों में आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(2) एवं 59(क) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
पलारी से लेकर कसडोल तक कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार 20 मई को वृत्त पलारी क्षेत्र में आबकारी विभाग ने भरवाडीह निवासी परदेशनिन भारती के कब्जे से 10 पाव यानी 1.8 बल्क लीटर देशी मदिरा मसाला जब्त किया। इसके बाद 21 मई को संयुक्त टीम ने बलौदाबाजार क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए खपरी (R) निवासी सुभाष पात्रे के कब्जे से 30 पाव और बिटकुली निवासी हेमंत कुमार जांगड़े के कब्जे से 40 पाव देशी मदिरा मसाला जब्त किया। दोनों मामलों में कुल 12.6 बल्क लीटर मदिरा मसाला बरामद हुआ।
वहीं 23 मई को कसडोल वृत्त अंतर्गत सोनाखान चौकी क्षेत्र के महकम गांव में कार्रवाई करते हुए आरोपी बहादुर के कब्जे से 15 लीटर हाथभट्ठी महुआ शराब और लगभग 200 किलोग्राम महुआ लाहन जब्त किया गया। विभाग के अनुसार जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 23 हजार रुपये आंकी गई है।
कार्रवाई से ज्यादा चर्चा “टीम” की
इस पूरी कार्रवाई में सबसे ज्यादा चर्चा आबकारी विभाग की सक्रिय टीम को लेकर हो रही है। आमतौर पर विभाग में लंबे समय से संख्या बल की कमी की बातें सामने आती रही हैं। यही कारण रहा कि क्षेत्र में वर्षों से कुछ तथाकथित “मुखबिरों” और बाहरी लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई बार यह आरोप भी लगते रहे कि विभागीय कार्रवाई में निजी लोगों की दखल बढ़ती जा रही है।
लेकिन इस बार की कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी जलेश कुमार सिंह सहित आबकारी उपनिरीक्षक मनराखन नेताम, पी. माधव राव, विनोद बांधे और विभागीय आरक्षक सक्रिय रूप से मैदान में नजर आए। इससे यह संदेश गया कि विभाग अब अपनी कार्रवाई सीधे अपने अमले के माध्यम से संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
क्या बदल रही है विभाग की कार्यशैली?
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि आबकारी विभाग इसी तरह अपनी नियमित टीम के साथ कार्रवाई करता रहा, तो अवैध शराब कारोबार पर ज्यादा प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकता है। लोगों का कहना है कि जब विभाग स्वयं मैदान में उतरता है, तब कार्रवाई की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों बढ़ती हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि बीते समय में “मुखबिरी” और “प्राइवेट कार्रवाई” जैसे शब्दों ने विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में अब यदि विभाग बाहरी हस्तक्षेप से दूरी बनाकर केवल विभागीय टीम के माध्यम से कार्रवाई को आगे बढ़ाता है, तो इसका सकारात्मक असर पूरे जिले में देखने को मिल सकता है।
जनता की नजर अब आगे की कार्रवाई पर
हालिया कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आबकारी विभाग इसी सक्रियता और पारदर्शिता को लगातार बनाए रख पाएगा। क्योंकि अवैध शराब का नेटवर्क केवल छोटी-मोटी जब्ती तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में इसका बड़ा प्रभाव लंबे समय से देखा जाता रहा है।
फिलहाल विभाग की इस कार्रवाई ने इतना जरूर संकेत दे दिया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और विभागीय टीम दोनों एक साथ सक्रिय हों, तो अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।












