प्रभात न्यूज़ 24:
उड़ेला पंचायत सचिव की गैरमौजूदगी से ग्रामीणों को भारी परेशानी
हितग्राही परेशान, कामकाज पर पड़ा असर
संवाददाता - विजय शंकर तिवारी
बलौदा बाजार
बलौदाबाजार जिले की उड़ेला पंचायत में सचिव की लगातार अनुपस्थिति के चलते ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत कार्यालय में सचिव का 15-15 दिन तक न आना न केवल प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
ग्रामीणों की परेशानी और सचिव की गैर-जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत उड़ेला के सचिव का मोबाइल फोन अक्सर बंद रहता है, जिससे उनसे संपर्क करना असंभव हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव की गैरमौजूदगी के कारण पात्रता पर्ची, राशन कार्ड, और अन्य महत्वपूर्ण कार्य जो सचिव और सरपंच के हस्ताक्षर के बिना पूरे नहीं हो सकते, अटक गए हैं।
सचिव के अन्य पंचायतों में आना-जाना
उप सरपंच उदेराम निर्मलकर और मनहरण कुर्रे ने बताया कि सचिव अक्सर गोर्दी पंचायत में दिखाई देते हैं, जबकि उनका निवास स्थान हथबंध में है, जो उड़ेला से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद पंचायत भवन में हमेशा ताला लटका रहता है, जिससे प्राथमिक सुविधाएं ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही हैं।
सरपंच का पद खाली, सचिव पर कार्यभार का दबाव
ग्राम पंचायत उड़ेला की सरपंच को पंचायती राज अधिनियम की धारा 40 के तहत आर्थिक अनियमितताओं के कारण हटा दिया गया है। इसके बाद भी अब तक किसी को सरपंच का प्रभार नहीं दिया गया है। जनपद पंचायत के सीईओ के निर्देश के बावजूद सचिव ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है।
हितग्राहियों का कहना
ग्रामीण हितग्राही इस स्थिति से नाराज हैं और उनकी शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। उनका कहना है कि राशन कार्ड या अन्य प्रमाण पत्रों के कार्य में देरी होने से वे बार-बार पंचायत भवन के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
इस पूरी स्थिति से यह स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव की गैर-जिम्मेदारी के चलते न केवल उनके छोटे-छोटे कार्य अटक रहे हैं, बल्कि उन्हें प्राथमिक सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सचिव की गैरहाजिरी पर कार्रवाई की जाए और पंचायत भवन में ताले की समस्या का समाधान किया जाए। साथ ही, किसी सक्षम व्यक्ति को सरपंच का कार्यभार सौंपा जाए, ताकि पंचायत के काम सुचारु रूप से चल सकें।
प्रशासन का जवाब
जनपद पंचायत सीईओ ने मामले की जांच कराने और जल्द से जल्द समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि सचिव को नियमित रूप से पंचायत में उपस्थित रहने और सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया जाएगा।
निष्कर्ष
उड़ेला पंचायत में सचिव की अनुपस्थिति और प्रशासनिक उदासीनता ने ग्रामीणों के जीवन को कठिन बना दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और ग्रामीणों को राहत प्रदान करता है।















