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विश्व आदिवासी दिवस पर कुकदा में गूंजा सामाजिक एकता और संस्कृति संरक्षण का संदेश विधायक इंद्र साव ने कहा—जल, जंगल और जमीन की रक्षा में आदिवासी समाज का योगदान अतुलनीय, शिक्षा से ही विकास को मिलेगी नई दिशा

भक्ति 10 August 2026 (31)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

विश्व आदिवासी दिवस पर कुकदा में गूंजा सामाजिक एकता और संस्कृति संरक्षण का संदेश

विधायक इंद्र साव ने कहा—जल, जंगल और जमीन की रक्षा में आदिवासी समाज का योगदान अतुलनीय, शिक्षा से ही विकास को मिलेगी नई दिशा



भाटापारा। 

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर ग्राम कुकदा में आदिवासी समाज की ओर से भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोगों, युवाओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन के दौरान आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास की झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समाज के लोगों ने लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी ऐतिहासिक विरासत को जीवंत किया।



कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक इंद्र साव विशेष रूप से शामिल हुए। उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए समाज की एकजुटता, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक विकास को लेकर महत्वपूर्ण बातें रखीं।



आदिवासी समाज का इतिहास संघर्ष और बलिदान से भरा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक इंद्र साव ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास संघर्ष, साहस और बलिदान की गौरवशाली गाथाओं से भरा हुआ है। देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और स्वतंत्रता आंदोलनों में आदिवासी समाज के अनेक वीर योद्धाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।



उन्होंने कहा कि वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, रानी दुर्गावती और भगवान बिरसा मुंडा जैसे महान व्यक्तित्व आज भी समाज और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इन महापुरुषों ने अपने अधिकारों, समाज और मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और स्वाभिमान की मिसाल कायम की।



विधायक ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी एकता और अपनी जड़ों से जुड़ाव में होती है। इसलिए नई पीढ़ी को अपने समाज के इतिहास, परंपराओं और महापुरुषों के संघर्ष से परिचित कराना बेहद जरूरी है।



संस्कृति की पहचान बचाना हर पीढ़ी की जिम्मेदारी

इंद्र साव ने कहा कि आधुनिक दौर में विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। आदिवासी समाज की लोककला, लोकगीत, नृत्य, पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।



उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठ लोगों की जिम्मेदारी है कि वे अपनी परंपराओं और इतिहास की जानकारी बच्चों और युवाओं तक पहुंचाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों को न भूलें।

उन्होंने कहा कि संस्कृति को आगे बढ़ाने का अर्थ केवल परंपराओं को निभाना नहीं है, बल्कि उसके पीछे मौजूद सामाजिक मूल्यों, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक भावना को भी अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।



जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में आदिवासी समाज की अहम भूमिका

विधायक इंद्र साव ने कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति के साथ सदियों पुराना संबंध रहा है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग में आदिवासी समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

उन्होंने कहा कि जंगल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि आदिवासी समाज के जीवन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। प्रकृति के संरक्षण को लेकर आदिवासी समाज की पारंपरिक समझ आज पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण संदेश देती है।



उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाना होगा।



शिक्षा को बताया समाज की प्रगति का सबसे मजबूत आधार

विधायक ने कार्यक्रम में समाज के लोगों से विशेष रूप से बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक विकास और आर्थिक मजबूती के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने कहा कि बेटा और बेटी दोनों को समान अवसर मिलना चाहिए। समाज की तरक्की तभी संभव है, जब हर परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दे।



इंद्र साव ने युवाओं से भी आगे बढ़कर शिक्षा, तकनीकी ज्ञान, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं के लिए पारंपरिक रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार और नए कौशल के क्षेत्र में भी अनेक संभावनाएं मौजूद हैं।



युवाओं की भागीदारी से मजबूत होगा सामाजिक संगठन

कार्यक्रम में आदिवासी युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली। युवाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ समाज की एकता और विकास को लेकर अपनी भूमिका पर चर्चा की।

विधायक इंद्र साव ने कहा कि किसी भी समाज का भविष्य उसके युवाओं पर निर्भर करता है। युवा यदि अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाएं, तो समाज तेजी से आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने युवाओं से सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, शिक्षा को बढ़ावा देने और समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।



पारंपरिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे महिला-पुरुषों और युवाओं ने लोकगीत एवं पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकजीवन की झलक देखने को मिली।



कार्यक्रम स्थल पर समाज के महापुरुषों और ऐतिहासिक योगदान को भी याद किया गया। उपस्थित लोगों ने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास और अपने पूर्वजों के संघर्ष को नमन किया।



सामाजिक एकता और विकास का लिया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने सामाजिक एकता को मजबूत करने, बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने, युवाओं को आगे बढ़ाने तथा अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।



वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह समाज के इतिहास, अधिकारों, संस्कृति, शिक्षा और भविष्य की दिशा पर विचार करने का अवसर भी है।



कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग और युवा संगठन के साथी मौजूद रहे। इस दौरान शशांक चौबे, संतोष ध्रुव, जगेश्वर ध्रुव, शंकरलाल ध्रुव, संतराम ध्रुव, रामजी ध्रुव, मोहन ध्रुव, तिलक ध्रुव, लीलुराम ध्रुव, पवन ध्रुव, ओमप्रकाश ध्रुव, जयप्रकाश ध्रुव, सूर्या ध्रुव, कमल प्रसाद मिरी, मोहन छेदईहा, लीलू छेदईहा, पवन छेदईहा, प्रकाश छेदईहा, सूर्या जगत, ओमप्रकाश, काशी पोर्ते एवं परमेश्वर ध्रुव सहित बड़ी संख्या में समाज के युवा और ग्रामीण उपस्थित रहे।



कुकदा में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृVarela Roundतिक संरक्षण, शिक्षा और युवा सशक्तिकरण के संदेश के साथ संपन्न हुआ।

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