प्रभात न्यूज़ 24:
थाने से अदालत तक पहुंचा व्यापारी: पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल, ठगी और धमकी के आरोपों में न्यायालय की शरण
एसपी, कलेक्टर और सीएम जनशिकायत पोर्टल में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप; 7 मोबाइल फोन ले जाने और चेक बाउंस का मामला
बलौदाबाजार।
बलौदाबाजार शहर में एक व्यापारी द्वारा पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। व्यापारी का आरोप है कि कथित ठगी, गाली-गलौज और परिवार को जान से मारने तथा बच्चों के अपहरण की धमकी से संबंधित शिकायतों पर कई स्तरों पर गुहार लगाने के बावजूद उसे अब तक अपेक्षित पुलिस कार्रवाई नहीं मिली।
आखिरकार न्याय की उम्मीद लेकर व्यापारी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM), बलौदाबाजार की अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
व्यापारी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद के अनुसार मामला मोबाइल फोन के लेन-देन, कथित बकाया रकम, चेक बाउंस तथा बाद में कथित धमकी और गाली-गलौज से जुड़ा हुआ है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायत देने के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
सात प्रीमियम मोबाइल फोन ले जाने का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, बजरंग चौक, बलौदाबाजार स्थित वलेचा मार्केटिंग, जो मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान का व्यवसाय करता है, के संचालक राजकुमार वलेचा (45) ने भाटापारा निवासी निर्माण उर्फ नीर किंगरानी के खिलाफ न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी कथित तौर पर दुकान से सात प्रीमियम मोबाइल फोन देखने और पसंद करने के नाम पर ले गया था। व्यापारी का आरोप है कि मोबाइल ले जाने के बाद न तो संबंधित मोबाइल वापस किए गए और न ही उनकी कीमत का भुगतान किया गया।
व्यापारी का कहना है कि उसने कई बार बकाया राशि के लिए संपर्क किया और भुगतान करने का आग्रह किया, लेकिन कथित तौर पर उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद मामला और गंभीर तब हो गया, जब भुगतान के लिए चेक के माध्यम से रकम दिलाने की कोशिश की गई।
चेक बाउंस होने से बढ़ा विवाद
परिवाद में व्यापारी ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने स्वयं चेक देने के बजाय जयपुर से एक चेक उसके बैंक खाते में लगवाया।
व्यापारी के अनुसार, संबंधित चेक बाद में बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि चेक बाउंस होने के कारण उसके बैंक खाते से पेनल्टी की राशि काट ली गई।
व्यापारी का आरोप है कि एक ओर उसे मोबाइल की रकम प्राप्त नहीं हुई, वहीं दूसरी ओर चेक बाउंस होने के कारण उसे अतिरिक्त आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
इसके बाद उसने मामले को लेकर पुलिस से संपर्क किया।
बकाया रकम मांगने पर कथित गाली-गलौज और धमकी
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसने अपनी बकाया राशि वापस मांगी तो कथित रूप से विवाद बढ़ गया। व्यापारी का आरोप है कि उसे गाली-गलौज की गई और बाद में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
परिवाद में 21 अप्रैल 2026 की एक कथित घटना का उल्लेख किया गया है। व्यापारी के अनुसार, उस दिन आरोपी ने व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से उसे कथित तौर पर अश्लील गालियां दीं तथा जान से मारने और उसके बच्चों को उठवा लेने जैसी गंभीर धमकी दी।
व्यापारी का कहना है कि इस घटना के बाद वह और उसका परिवार भय के माहौल में रहने को मजबूर हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसने कथित कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रखी और शिकायत के साथ इसे प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किए जाने की बात कही है।
सिटी कोतवाली से लेकर एसपी और कलेक्टर कार्यालय तक शिकायत
व्यापारी के मुताबिक उसने घटना की जानकारी सबसे पहले स्थानीय पुलिस को दी। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर पर भी शिकायतें प्रस्तुत कीं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने अपनी शिकायत के साथ कथित धमकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग वाली सीडी भी उपलब्ध कराई, ताकि पुलिस मामले की जांच कर सके और संबंधित कॉल की सत्यता की पुष्टि की जा सके।
इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए व्यापारी ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष दोबारा अपनी समस्या रखी।
सीएम जनशिकायत पोर्टल पर भी लगाई गुहार
व्यापारी ने केवल स्थानीय स्तर पर ही शिकायत नहीं की, बल्कि राज्य सरकार के जनशिकायत तंत्र के माध्यम से भी अपनी समस्या दर्ज कराने का दावा किया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने सीएम जनशिकायत पोर्टल पर भी मामले की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उसका आरोप है कि वहां शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली।
इस घटनाक्रम के बाद व्यापारी ने सवाल उठाया है कि यदि स्थानीय थाने से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और शासन के शिकायत तंत्र तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है, तो आम नागरिक न्याय के लिए आखिर किस दरवाजे पर जाए?
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस अथवा आरोपी पक्ष का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर आरोप
व्यापारी ने अपने परिवाद में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि मामले में पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उसे कथित तौर पर समय देने की बात कही गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि पुलिस के एक अधिकारी ने उससे फोन पर बातचीत के दौरान कथित रूप से यह कहा कि आरोपी के पिता से उनके अच्छे संबंध हैं और इसलिए आरोपी को कुछ और समय दिया जाए।
व्यापारी का आरोप है कि इसी तरह की कथित समझाइश और देरी के कारण मामला लंबा खिंचता चला गया और उसे आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।
हालांकि पुलिस की ओर से इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस कार्रवाई नहीं होने का दावा, इसलिए अदालत की शरण
व्यापारी का कहना है कि उसने न्याय पाने के लिए पहले पुलिस और प्रशासन के सभी उपलब्ध माध्यमों का उपयोग किया। लेकिन जब उसे वहां से अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली तो उसने न्यायालय का रुख किया।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, बलौदाबाजार के समक्ष प्रस्तुत परिवाद में व्यापारी ने मामले की जांच और आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने अपने परिवाद में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 296 एवं 351(3) के तहत अपराध दर्ज करने और संबंधित पुलिस थाने को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।
अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही और पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
कई सवालों के बीच पहुंचा मामला न्यायालय
पूरे घटनाक्रम ने पुलिस व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। यदि व्यापारी द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल यह है कि गंभीर धमकी की शिकायत और उपलब्ध कराए गए कथित ऑडियो साक्ष्य पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
दूसरी ओर, यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो जांच के दौरान वास्तविक स्थिति सामने आना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि मामले में निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
व्यापारी का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं, बल्कि कथित रूप से हुए आर्थिक नुकसान, धमकी और मानसिक प्रताड़ना के मामले में कानूनी न्याय प्राप्त करना है।
अदालत की प्रक्रिया से कार्रवाई की उम्मीद
लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाने वाले व्यापारी ने अब न्यायालय से उम्मीद जताई है कि उसके परिवाद पर विधि के अनुरूप सुनवाई होगी और यदि प्रथमदृष्टया अपराध बनता है तो संबंधित एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
फिलहाल यह मामला अदालत के समक्ष है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। आरोपी पक्ष का बयान अथवा पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
सात मोबाइल फोन से जुड़े कथित लेन-देन की वास्तविक स्थिति क्या है?
चेक किसके माध्यम से जारी हुआ और वह किस कारण से बाउंस हुआ?
कथित धमकी वाले व्हाट्सऐप कॉल की तकनीकी जांच हुई या नहीं?
व्यापारी द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग का सत्यापन हुआ या नहीं?
थाने और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई?
सीएम जनशिकायत पोर्टल पर दर्ज शिकायत का निस्तारण किस स्तर पर हुआ?
पुलिस पर लगाए गए आरोपी को संरक्षण देने के आरोपों की जांच होगी या नहीं?
इन सवालों के जवाब जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल व्यापारी की निगाहें अदालत पर टिकी हैं। पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई नहीं होने के आरोपों के बाद अब मामला न्यायालय की चौखट तक पहुंच चुका है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस परिवाद पर क्या रुख अपनाती है और जांच के दौरान कथित ठगी, धमकी तथा पुलिस की भूमिका से जुड़े आरोपों की वास्तविकता किस प्रकार सामने आती है।














