प्रभात न्यूज़ 24:
बड़ी खबर | बलौदाबाजार में नशे का बढ़ता कारोबार!
शहर बना अवैध शराब और गांजा कारोबार का कथित अड्डा, घरों से बिक रही शराब? युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा — कार्रवाई के बजाय संरक्षण के आरोप
बलौदाबाजार।
जिला मुख्यालय बलौदाबाजार शहर में कथित तौर पर अवैध शराब और गांजा कारोबार का नेटवर्क लगातार पैर पसार रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में ऐसे कई ठिकानों की चर्चा है, जहां घर के भीतर से विभिन्न ब्रांड की शराब उपलब्ध कराए जाने और वहीं बैठकर शराब पीने की सुविधा दिए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही गांजा जैसे नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों और सूत्रों की मानें तो यह कारोबार कोई नया नहीं है। लंबे समय से कथित रूप से सक्रिय इन ठिकानों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर इन अवैध गतिविधियों को संचालित करने वालों तक कार्रवाई का हाथ क्यों नहीं पहुंच पा रहा है? क्या संबंधित विभाग को इन ठिकानों की जानकारी नहीं है, या फिर कहीं न कहीं संरक्षण का खेल चल रहा है?
शराब की दुकान से आगे बढ़ा अवैध कारोबार?
शहर में चर्चा है कि कुछ स्थानों पर शराब दुकान होने के बाद भी और भी कई जगहों पर मनचाहा ब्रांड उपलब्ध होने की बात कही जाती है। इतना ही नहीं, कथित तौर पर कुछ ठिकानों पर बैठकर शराब सेवन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाती है। यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल अवैध शराब बिक्री का मामला नहीं, बल्कि नशे के संगठित कारोबार और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल है।
सबसे बड़ा सवाल—युवाओं का भविष्य कौन बचाएगा?
नशे का सबसे ज्यादा असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। आसानी से उपलब्ध होने वाले नशीले पदार्थ युवाओं को अपराध, आर्थिक बर्बादी और सामाजिक पतन की ओर धकेल सकते हैं। अभिभावकों की चिंता बढ़ रही है और जनता अब प्रशासन से केवल छोटे-मोटे मामलों में कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़े नेटवर्क की पहचान कर उसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग कर रही है।
'छोटे खिलाड़ी' नहीं, असली नेटवर्क तक पहुंचे कार्रवाई
अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई होती है तो अक्सर छोटे स्तर पर शराब या नशीला पदार्थ रखने वालों पर कार्रवाई की खबर सामने आती है। लेकिन जनता का सवाल है कि आखिर इस अवैध सप्लाई की मुख्य कड़ी कौन है? माल कहां से आता है? पैसा किस तक पहुंचता है? और लंबे समय से कारोबार करने वाले कथित बड़े खिलाड़ियों पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?
इन सवालों का जवाब पुलिस और आबकारी विभाग को देना चाहिए।
नेताओं की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
अब जनता की नजर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों पर भी है। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के नेताओं से लोग अपेक्षा कर रहे हैं कि वे इस गंभीर सामाजिक समस्या को मजबूती से उठाएं। नशे के खिलाफ सिर्फ बयान नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई के लिए प्रशासन पर दबाव बनाने की जरूरत है।
प्रशासन के सामने चुनौती
बलौदाबाजार में यदि वास्तव में ऐसे अवैध ठिकाने संचालित हो रहे हैं तो पुलिस और आबकारी विभाग को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर उनकी जांच करनी चाहिए। साथ ही अवैध शराब और गांजा की आपूर्ति के स्रोत तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क की जांच आवश्यक है।
हालांकि, जिन ठिकानों या व्यक्तियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस समय नहीं हुई है। इसलिए संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।
अब सवाल सीधा है—क्या बलौदाबाजार को नशे के बढ़ते जाल से बचाने के लिए प्रशासन बड़े नेटवर्क पर हाथ डालेगा, या फिर कार्रवाई सिर्फ छोटे मामलों तक सीमित रहेगी?
बलौदाबाजार की जनता जवाब चाहती है।













