प्रभात न्यूज़ 24:
सड़क हादसों को रोकने भीम रेजिमेंट की अनूठी पहल, मवेशियों के गले में बांधी रेडियम पट्टी
अंधेरे में दूर से नजर आएंगे सड़क पर बैठे पशु, वाहन चालकों को मिलेगा समय रहते संभलने का मौका; युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष डिकेश्वर घृतलहरे के नेतृत्व में चलाया गया जागरूकता अभियान
बलौदाबाजार।
जिले में रात के समय सड़कों पर बैठे आवारा मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से भीम रेजिमेंट युवा मोर्चा ने एक अनूठी और जनहितकारी पहल की शुरुआत की है। संगठन के युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष डिकेश्वर घृतलहरे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रमुख सड़कों और मार्गों पर घूमने वाले मवेशियों के गले में चमकीली रेडियम रिफ्लेक्टिव पट्टियां बांधीं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य रात के समय सड़क पर मौजूद मवेशियों को वाहन चालकों के लिए आसानी से दिखाई देने योग्य बनाना है। संगठन का मानना है कि अंधेरे में मवेशियों की पहचान समय पर हो जाने से वाहन चालक अपनी गति कम कर सकेंगे और संभावित दुर्घटनाओं को टाला जा सकेगा।
यह अभियान न केवल पशुओं की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों की जान बचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रात के अंधेरे में सड़क पर बैठे मवेशी बनते हैं दुर्घटना का कारण
बलौदाबाजार शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले कई प्रमुख मार्गों पर रात के समय मवेशियों के सड़क पर बैठने की समस्या देखी जाती है।
विशेषकर शाम ढलने के बाद कई पशु सड़क, डिवाइडर, पुल-पुलिया के आसपास या सड़क किनारे बैठे नजर आते हैं।
रात के अंधेरे में इन पशुओं का शरीर सड़क के रंग और वातावरण में आसानी से नजर नहीं आता। ऐसे में तेज गति से आने वाले दोपहिया, कार, ट्रक और अन्य वाहनों के चालकों को अचानक सामने मवेशी दिखाई देने पर वाहन नियंत्रित करने में कठिनाई होती है।
कई बार चालक अचानक ब्रेक लगाते हैं, जिससे वाहन अनियंत्रित हो जाता है और दुर्घटना की स्थिति बन जाती है। वहीं कुछ मामलों में वाहन सीधे पशुओं से टकरा जाते हैं। ऐसी घटनाओं में वाहन सवारों को चोट लगने के साथ-साथ बेजुबान पशुओं की भी जान चली जाती है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए भीम रेजिमेंट युवा मोर्चा ने जमीनी स्तर पर पहल करते हुए मवेशियों के गले में रेडियम पट्टी बांधने का निर्णय लिया।
हेडलाइट पड़ते ही चमकेगी पट्टी
अभियान के दौरान मवेशियों के गले में विशेष रिफ्लेक्टिव रेडियम बेल्ट बांधी गई। इस पट्टी की विशेषता यह है कि वाहन की हेडलाइट की रोशनी पड़ने पर यह चमकने लगती है।
इससे अंधेरे में सड़क पर मौजूद मवेशी वाहन चालक को अपेक्षाकृत पहले दिखाई दे सकते हैं। वाहन चालक को सामने किसी वस्तु या पशु की मौजूदगी का संकेत मिल जाता है और वह अपनी गति कम कर वाहन को नियंत्रित कर सकता है।
संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, यह बेहद सामान्य और कम लागत वाला उपाय है, लेकिन सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसका प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि इस तरह की पहल व्यापक स्तर पर अपनाई जाए तो रात के समय मवेशियों से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
डिकेश्वर घृतलहरे ने कहा—सड़क सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी
भीम रेजिमेंट युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष डिकेश्वर घृतलहरे ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सड़क पर मौजूद मवेशी अपनी सुरक्षा के लिए कोई निर्णय नहीं ले सकते। वे बोल नहीं सकते और न ही यह समझ सकते हैं कि तेज रफ्तार वाहन उनके लिए कितना बड़ा खतरा है। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए समाज को ही पहल करनी होगी।
घृतलहरे के मुताबिक, एक छोटी सी रेडियम पट्टी किसी पशु की जान बचाने के साथ-साथ वाहन चालक और उसके परिवार को भी संभावित हादसे से बचा सकती है। उन्होंने कहा कि संगठन का प्रयास है कि लोगों में सड़क सुरक्षा और पशु सुरक्षा दोनों को लेकर जागरूकता पैदा हो।
युवाओं और सामाजिक संगठनों से आगे आने की अपील
भीम रेजिमेंट ने नागरिकों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और पशु प्रेमियों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस तरह के अभियान को आगे बढ़ाएं।
संगठन का कहना है कि यदि शहर और गांवों में सड़कों पर घूमने वाले अधिक से अधिक मवेशियों के गले में रिफ्लेक्टिव पट्टियां लगाई जाएं तो रात के समय उनकी दृश्यता बढ़ाई जा सकती है।
इसके साथ ही पशुपालकों से भी अपील की गई कि वे अपने मवेशियों को खुले में सड़कों पर न छोड़ें। पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखने से सड़क दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सिर्फ पट्टी बांधना नहीं, लोगों को भी किया जागरूक
अभियान के दौरान भीम रेजिमेंट के कार्यकर्ताओं ने केवल मवेशियों के गले में रेडियम पट्टी लगाने का काम ही नहीं किया, बल्कि सड़क से गुजरने वाले लोगों को भी यातायात सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।
कार्यकर्ताओं ने वाहन चालकों से रात के समय विशेष सावधानी बरतने, निर्धारित गति से वाहन चलाने और सड़क पर अचानक मवेशी दिखाई देने की स्थिति में घबराने के बजाय वाहन को नियंत्रित करने की अपील की।
विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों से हेलमेट पहनने और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने का संदेश भी दिया गया।
पशु सुरक्षा के साथ मानव जीवन बचाने की कोशिश
भीम रेजिमेंट की इस पहल को केवल पशु संरक्षण अभियान के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे मानव जीवन की सुरक्षा का उद्देश्य भी जुड़ा हुआ है।
सड़क पर अचानक मवेशी दिखाई देने से होने वाली दुर्घटनाओं में कई बार वाहन चालक और राहगीर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।
वहीं टक्कर की स्थिति में पशुओं को भी गंभीर चोट लगती है।
ऐसे में रेडियम पट्टी दोनों पक्षों की सुरक्षा के लिए एक छोटी लेकिन उपयोगी सावधानी साबित हो सकती है। वाहन चालक को सड़क पर मौजूद पशु की जानकारी पहले मिलने से वह गति कम कर सकता है और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सकता है।
प्रशासन के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी
सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन, नगर निकाय, पुलिस, परिवहन विभाग और नागरिकों की संयुक्त भूमिका जरूरी है। आवारा मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान केवल सड़क से पशुओं को हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करने, गौशालाओं और पशु आश्रय व्यवस्थाओं को मजबूत करने तथा प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा उपाय बढ़ाने की दिशा में भी काम होना चाहिए।
इसी कड़ी में सामाजिक संगठनों की ओर से किए जाने वाले छोटे-छोटे प्रयास लोगों में जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आगे भी अभियान जारी रखने की तैयारी
भीम रेजिमेंट युवा मोर्चा की ओर से संकेत दिया गया कि सड़क सुरक्षा और पशु सुरक्षा से जुड़े इस अभियान को आगे भी जारी रखने का प्रयास किया जाएगा। संगठन का उद्देश्य अधिक से अधिक मवेशियों को रिफ्लेक्टिव पट्टियां उपलब्ध कराना और नागरिकों को इस समस्या के प्रति संवेदनशील बनाना है।
संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों और चालान तक सीमित विषय नहीं है। इसमें संवेदनशीलता, सावधानी और सामाजिक भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।
एक छोटी पहल, बड़ा संदेश
मवेशियों के गले में रेडियम पट्टी बांधने का यह अभियान भले ही देखने में छोटा प्रयास हो, लेकिन इसके पीछे सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण का बड़ा संदेश छिपा है। यदि वाहन चालक सावधानी बरतें, पशुपालक अपने पशुओं को सड़कों पर खुला न छोड़ें और समाज के लोग दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा के लिए आगे आएं, तो कई अनहोनी घटनाओं को रोका जा सकता है।
भीम रेजिमेंट युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष डिकेश्वर घृतलहरे के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल इसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास है—सड़क पर हर जिंदगी कीमती है, चाहे वह इंसान की हो या बेजुबान पशु की।















