प्रभात न्यूज़ 24:
हथबंध पंचायत में प्रशासनिक फेरबदल, नए सचिव की अस्थायी पदस्थापना से बढ़ी हलचल
जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला पंचायत का आदेश, शिवप्रसाद धृतलहरे को 7 दिन में कार्यभार संभालने के निर्देश; पूर्व सचिव विनोद वैष्णव से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच की मांग तेज
हथबंध/सिमगा।
ग्राम पंचायत हथबंध में सचिव पद को लेकर लंबे समय से जारी प्रशासनिक खींचतान के बीच जिला पंचायत बलौदाबाजार-भाटापारा ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। जिला पंचायत की ओर से 10 अगस्त 2026 को जारी आदेश के अनुसार जनपद पंचायत भाटापारा के अंतर्गत ग्राम पंचायत गुर्रा में पदस्थ सचिव शिवप्रसाद धृतलहरे को प्रशासनिक व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत हथबंध में आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है।
प्रशासन के इस फैसले के बाद हथबंध पंचायत में पंचायत संबंधी कामकाज को लेकर नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति बन गई है। जारी आदेश में नए सचिव को सात दिवस के भीतर ग्राम पंचायत हथबंध में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना गया है।
जांच प्रतिवेदन के बाद प्रशासन का कदम
मिली जानकारी के अनुसार यह प्रशासनिक आदेश जनपद पंचायत सिमगा के जांच प्रतिवेदन क्रमांक 1886, दिनांक 6 अगस्त 2026 तथा जनपद पंचायत भाटापारा से प्राप्त पत्र/प्रस्ताव के आधार पर जारी किया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर की गई जांच और संबंधित पंचायत की परिस्थितियों को देखते हुए हथबंध में नए सचिव की अस्थायी पदस्थापना का निर्णय लिया गया है। इसे पंचायत के नियमित प्रशासनिक एवं वित्तीय कामकाज को व्यवस्थित बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
हालांकि, नए सचिव की पदस्थापना को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की नजर अब इस बात पर है कि पंचायत से जुड़े पुराने विवादों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
पूर्व सचिव विनोद वैष्णव को लेकर शिकायतों का मुद्दा
ग्राम पंचायत हथबंध में पूर्व में सचिव के रूप में कार्यरत रहे विनोद दास वैष्णव को लेकर पंचायत के कामकाज एवं वित्तीय मामलों से संबंधित शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ताओं की ओर से पंचायत के वित्तीय लेनदेन, अभिलेखों के रखरखाव और कुछ कथित आर्थिक अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत से जुड़े कुछ वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की स्थिति की जांच आवश्यक है। इसके अलावा पूर्व सचिव को भारमुक्त किए जाने के बाद पंचायत के खाते से कथित रूप से राशि आहरित किए जाने के आरोपों की भी जांच की मांग उठाई गई है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में संबंधित दस्तावेजों, पंचायत के बैंक रिकॉर्ड, कैशबुक, भुगतान संबंधी अभिलेखों और अन्य सरकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
भारमुक्ति के बाद के लेनदेन पर उठे सवाल
हथबंध पंचायत से जुड़े विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू पूर्व सचिव के भारमुक्त होने के बाद हुए कथित वित्तीय लेनदेन को बताया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि भारमुक्ति के बाद पंचायत के खाते से यदि कोई राशि निकाली गई, तो वह किस प्रक्रिया के तहत निकाली गई और उसके लिए कौन-कौन से अधिकृत दस्तावेज मौजूद हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत के बैंक खाते से होने वाले प्रत्येक वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए और नियमानुसार स्वीकृति एवं अधिकृत हस्ताक्षर की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। इसी आधार पर संबंधित अवधि के बैंक स्टेटमेंट और पंचायत के वित्तीय दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है।
नए सचिव के सामने बड़ी जिम्मेदारी
अब ग्राम पंचायत हथबंध की जिम्मेदारी नए सचिव शिवप्रसाद धृतलहरे के हाथों में आने वाली है। प्रशासन की ओर से उन्हें सात दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
नए सचिव के सामने पंचायत के रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों को गति देने के साथ-साथ पंचायत के रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों को व्यवस्थित रखने की भी चुनौती होगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सचिव के कार्यभार संभालने के बाद लंबित पंचायत कार्यों, प्रमाण-पत्रों, विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी।
पंचायत के वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखना भी नए सचिव के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
ग्रामीणों की निगाह अब जांच की अगली कार्रवाई पर
नए सचिव की पदस्थापना के बाद हथबंध पंचायत में प्रशासनिक व्यवस्था तो बदल गई है, लेकिन शिकायतों से जुड़े मूल सवाल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ग्रामीण और शिकायतकर्ता अब यह जानना चाहते हैं कि पूर्व में सामने आई शिकायतों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
यदि वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों की जांच की जाती है, तो पंचायत के बैंक खाते, भुगतान वाउचर, कैशबुक, प्रस्ताव पुस्तिका, संकल्प रजिस्टर, बिल, मस्टर रोल तथा संबंधित अन्य अभिलेखों का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जाएगा। इसके साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि जिन कार्यों के लिए राशि जारी हुई, वे वास्तव में मौके पर हुए या नहीं।
दस्तावेजों की जांच से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति
पंचायतों में वित्तीय मामलों से जुड़े विवादों में दस्तावेजी जांच की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी राशि के आहरण या भुगतान को लेकर केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण आवश्यक होता है।
हथबंध मामले में भी यदि प्रशासन विस्तृत जांच करता है तो कथित वित्तीय लेनदेन की तारीख, राशि, भुगतान का उद्देश्य, संबंधित स्वीकृति, बैंक रिकॉर्ड और भुगतान प्राप्त करने वाले पक्ष सहित तमाम बिंदुओं की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इसी कारण शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराने की मांग की है, ताकि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय की जा सके और यदि शिकायतों में तथ्य नहीं मिलते हैं तो वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो।
प्रशासनिक आदेश के बाद बढ़ी उम्मीदें
जिला पंचायत के नए आदेश से हथबंध पंचायत में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नई शुरुआत की उम्मीद जगी है। अस्थायी तौर पर नए सचिव की पदस्थापना से पंचायत के दैनिक कार्यों को नियमित रूप से संचालित करने का रास्ता साफ हुआ है।
अब देखना यह होगा कि नए सचिव निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्यभार ग्रहण करने के बाद पंचायत के कामकाज को किस तरह व्यवस्थित करते हैं और पूर्व में लंबित कार्यों को किस गति से आगे बढ़ाया जाता है।
वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ताओं की मांग है कि केवल सचिव की पदस्थापना तक मामला सीमित न रहे, बल्कि पंचायत के पुराने वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों की भी निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी
विनोद दास वैष्णव के संबंध में लगाए गए वित्तीय अनियमितता संबंधी आरोप फिलहाल शिकायतकर्ताओं द्वारा उठाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा अंतिम रूप से दोष सिद्ध होने की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए निष्पक्षता की दृष्टि से संबंधित पक्ष का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो सक्षम प्रशासनिक स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा।
हथबंध पंचायत में अब आगे क्या?
जिला पंचायत के आदेश के बाद फिलहाल तीन प्रमुख बिंदुओं पर सबकी नजर रहेगी—
पहला, नए सचिव शिवप्रसाद धृतलहरे कब तक हथबंध पंचायत में कार्यभार ग्रहण करते हैं।
दूसरा, पंचायत के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों को नई व्यवस्था के तहत किस तरह संचालित किया जाता है।
तीसरा, पूर्व सचिव से संबंधित शिकायतों और कथित वित्तीय लेनदेन की जांच आगे किस स्तर तक पहुंचती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
कुल मिलाकर हथबंध ग्राम पंचायत में सचिव पद को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई के नए चरण में पहुंच गया है। जिला पंचायत द्वारा नए सचिव की अस्थायी पदस्थापना के बाद पंचायत के कामकाज को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम जरूर उठाया गया है, लेकिन शिकायतों से जुड़े सवालों का अंतिम जवाब जांच और दस्तावेजी परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।
अब ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।















