प्रभात न्यूज़ 24:
कोनारी पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, पंचों व ग्रामीणों ने कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग
शासकीय राशि के आहरण से लेकर निर्माण कार्यों, गौठान मार्ग और मुरूम खनन तक उठाए गंभीर सवाल; पंचायत के निर्वाचित सदस्यों ने धारा 40 के तहत कार्रवाई की मांग
पलारी/बलौदाबाजार।
ग्राम पंचायत कोनारी में कथित वित्तीय अनियमितताओं और पंचायत के कार्यों में नियमों की अनदेखी को लेकर ग्राम पंचायत के पंचों एवं ग्रामीणों ने जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। पंचों एवं ग्रामीणों द्वारा 24 अगस्त 2026 को कलेक्टर बलौदाबाजार-भाटापारा के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में पंचायत की शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग, निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता, शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण, बिना अनुमति मुरूम खनन तथा पंचायत कार्यों में बाहरी हस्तक्षेप सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित सरपंच के विरुद्ध छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई करते हुए पद से हटाने की मांग की है।
₹1.79 लाख की पंचायत राशि को लेकर गंभीर आरोप
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि पंचायत खाते/शासकीय मद की लगभग ₹1,79,130 की राशि आहरित कर अपने पास रखी गई, जिसे शिकायतकर्ताओं ने शासकीय राशि के कथित गबन से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस संबंध में जनपद पंचायत स्तर तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा से संबंधित जांच प्रतिवेदन का हवाला दिया गया है।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम प्रशासनिक अथवा जांच एजेंसी द्वारा होना अभी बाकी है।
गली मरम्मत के कार्य में भी राशि और काम के अंतर का दावा
शिकायत पत्र के अनुसार ग्राम की गली मरम्मत/बजरीकरण कार्य के लिए विभिन्न मदों से कुल ₹4,39,630 की राशि से संबंधित आहरण का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मौके पर करीब ₹2,89,500 का ही कार्य कराया गया और शेष राशि के संबंध में गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
पंचों एवं ग्रामीणों ने पूरे मामले का तकनीकी मूल्यांकन एवं भौतिक सत्यापन कराए जाने की मांग की है।
गौठान मार्ग समतलीकरण को लेकर भी उठे सवाल
शिकायत में गौठान मार्ग समतलीकरण के लिए 15वें वित्त मद से ₹49,500 आहरित किए जाने तथा मौके पर करीब ₹20,500 का कार्य होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार दोनों राशियों के बीच का अंतर भी जांच का विषय है।
शासकीय घास भूमि पर कथित अतिक्रमण का आरोप
मामले में शासकीय घास भूमि के एक हिस्से पर पक्का मकान बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित भूमि के खसरा नंबर का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि मौके पर अतिक्रमण की स्थिति की पुष्टि पटवारी के पंचनामा एवं प्रतिवेदन से होती है।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल पंचायत प्रशासन तक सीमित न रहकर राजस्व एवं शासकीय भूमि से संबंधित कार्रवाई का विषय भी बन सकता है।
बिना अनुमति मुरूम खनन और पंचायत को राशि नहीं मिलने का आरोप
शिकायत में ग्राम के शासकीय तालाब क्षेत्र से कथित रूप से जेसीबी एवं ट्रैक्टर के माध्यम से मुरूम निकाले जाने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत प्रस्ताव एवं खनिज विभाग की अनुमति के बिना कथित खनन कराया गया तथा मुरूम से प्राप्त राशि पंचायत खाते में जमा नहीं किए जाने की आशंका है।
ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की जांच खनिज, राजस्व एवं पंचायत विभाग के माध्यम से कराए जाने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खनन हुआ या नहीं, यदि हुआ तो किसकी अनुमति से हुआ और उससे प्राप्त राशि का लेखा-जोखा क्या है।
पंचायत कार्यों में पारिवारिक हस्तक्षेप का भी आरोप
शिकायत पत्र में पंचायत की कार्यवाही में सरपंच के एक पारिवारिक सदस्य द्वारा कथित रूप से हस्तक्षेप किए जाने तथा पंचों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने पंचायत की स्वतंत्र एवं नियमसम्मत कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने की मांग की है।
वाहन किराये के भुगतान पर भी सवाल
शिकायत में पंचायत कार्यों के लिए निजी वाहन के इस्तेमाल और दूसरे वाहन का किराया दर्शाकर पंचायत निधि से भुगतान किए जाने संबंधी कथित अनियमितता का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित भुगतान, वाहन उपयोग, बिल एवं वाउचर की जांच की मांग की है।
सिन्टेक्स टंकी और मोटर पंप की खरीदी भी जांच के घेरे में
शिकायतकर्ताओं के अनुसार पंचायत में चार सिन्टेक्स टंकियों की खरीदी के नाम पर ₹88,101 और ₹97,540 की राशि के आहरण का उल्लेख है। आरोप है कि संबंधित टंकियां एवं मोटर पंप चिन्हित स्थानों पर लगाए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है तथा भुगतान से संबंधित बिलों की भी जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भुगतान किया गया है तो मौके पर सामग्री की उपलब्धता, खरीदी की प्रक्रिया, बिल, स्टॉक रजिस्टर और उपयोगिता का सत्यापन कराया जाना चाहिए।
शिकायत में जांच और कार्रवाई की मांग
पंचों एवं ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही पंचायत के बैंक खाते, भुगतान अभिलेख, बिल-वाउचर, माप पुस्तिका, मूल्यांकन, प्रस्ताव, स्टॉक रजिस्टर, कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन तथा संबंधित राजस्व एवं खनिज अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
शिकायतकर्ताओं ने जांच में अनियमितता अथवा शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई तथा पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
ग्राम पंचायत कोनारी से जुड़ा यह मामला फिलहाल पंचों एवं ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत शिकायत और उसमें लगाए गए आरोपों तक सीमित है। इन आरोपों को अभी प्रशासनिक जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।
इस समाचार के प्रकाशन तक संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों अथवा संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच के बाद ही संभव होगा। संबंधित प्रशासनिक अधिकारी अथवा अन्य पक्ष का अधिकृत बयान प्राप्त होने पर उसे भी निष्पक्षता के साथ जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पंचायत के अभिलेखों एवं मौके की वास्तविक स्थिति की जांच कराकर आरोपों की सच्चाई सामने लाई जाती है।















