प्रभात न्यूज़ 24:
खैदा में शराब पर छापा, माल बरामद… फिर भी ‘मेन माफिया’ गिरफ्त से बाहर!
बलौदाबाजार।
जिले में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग की कार्रवाई के बीच ग्राम खैदा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्रवाई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के दबाव के बाद आबकारी विभाग की टीम ने कथित रूप से एक लंबे समय से अवैध शराब कारोबार से जुड़े बताए जा रहे व्यक्ति के घर, दुकान और बयारे में दबिश दी। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के दौरान शराब भी बरामद हुई और प्रकरण दर्ज किया गया।
लेकिन सवाल यह है कि जब शराब कथित मुख्य शराब कारोबारी के ठिकाने से बरामद हुई, तो आखिर मुख्य आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर क्यों है?
माल यहां से मिला, प्रकरण किसी और पर?
सूत्रों के अनुसार खैदा में हुई कार्रवाई के दौरान शराब कथित रूप से उस व्यक्ति की दुकान और बयारे से मिली, जिस पर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से अवैध शराब के कारोबार को संचालित करने के आरोप लगते रहे हैं। इसके बावजूद चर्चा है कि कार्रवाई में खोरसी नाला क्षेत्र के एक युवक के खिलाफ शराब का प्रकरण दर्ज किया गया है।
यदि ऐसा है तो यह जांच का बेहद गंभीर विषय है। सवाल उठता है कि बरामद शराब की वास्तविक मालिकी, सप्लाई चैन और मौके पर मौजूद लोगों की भूमिका की जांच किस स्तर तक की गई?
आबकारी अधिकारी ने फोन पर कार्रवाई की बात मानी, लेकिन वर्जन देने से किया इनकार
मामले को लेकर आबकारी विभाग के A.D.O. जलेश कुमार सिंह से फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने कथित रूप से यह स्वीकार किया कि कार्रवाई की गई है और यह भी कहा कि यदि संबंधित आरोपी आगे चलकर शराब के साथ रंगे हाथों पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, जब उनसे पूरे मामले पर स्पष्ट आधिकारिक वर्जन और यह सवाल पूछा गया कि जिस ठिकाने से शराब बरामद होने की बात सामने आ रही है, उसके कथित मुख्य संचालक पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई, तो उन्होंने इस विषय पर किसी भी प्रकार का विस्तृत वर्जन देने से इनकार कर दिया।
ग्रामीणों के दबाव के बाद हुई कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ अवैध शराब के कारोबार को लेकर पहले भी शिकायतें और चर्चाएं होती रही हैं। इस मामले को लेकर पूर्व में खबरें प्रकाशित होने तथा शिकायतें किए जाने की बात भी सामने आती रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब जब गांव में इस मामले को लेकर दबाव बढ़ा, तब विभागीय टीम ने संबंधित ठिकाने पर पहुंचकर कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान शराब मिलने की बात सामने आने के बाद भी कथित मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
क्या छोटे किरदार पर कार्रवाई कर असली नेटवर्क को छोड़ा जा रहा है?
अवैध शराब का कारोबार केवल शराब बरामद करने तक सीमित मामला नहीं है। यदि किसी स्थान से शराब बरामद होती है तो यह भी जांच का विषय है कि शराब कहां से आई, किसने पहुंचाई, किसके संरक्षण में कारोबार चल रहा था और इससे जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि कथित शराब कारोबारी युवाओं को इस अवैध कारोबार में इस्तेमाल करता रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच का विषय है।
विभाग के सामने पांच बड़े सवाल
पहला सवाल: जिस ठिकाने से शराब बरामद हुई, उसके कथित संचालक की भूमिका की जांच क्यों नहीं?
दूसरा सवाल: यदि खोरसी नाला के युवक के खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ है तो उसकी भूमिका क्या थी?
तीसरा सवाल: बरामद शराब की सप्लाई कहां से हुई और उसके पीछे पूरा नेटवर्क कौन संचालित कर रहा था?
चौथा सवाल: पूर्व में शिकायतें मिलने के बावजूद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पांचवां और सबसे बड़ा सवाल: क्या आबकारी विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित मुख्य शराब कारोबारी तक पहुंचेगा?
अब कार्रवाई से ज्यादा निगाह जांच की दिशा पर
खैदा में हुई कार्रवाई ने अवैध शराब के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शराब बरामद होना निश्चित रूप से कार्रवाई का हिस्सा है, लेकिन यदि शराब किसी कथित मुख्य कारोबारी के ठिकाने से मिली है तो उसके पूरे नेटवर्क की जांच होना भी उतना ही जरूरी है।
फिलहाल A.D.O. जलेश कुमार सिंह द्वारा मामले पर विस्तृत वर्जन देने से इनकार किए जाने के बाद सवाल और गहरा गया है। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग आगे इस मामले में कथित मुख्य आरोपी तक पहुंचता है या कार्रवाई केवल एक अन्य व्यक्ति पर प्रकरण दर्ज करने तक सीमित रह जाती है।
खैदा के ग्रामीणों का सीधा सवाल है—शराब मिली है तो शराब का मालिक और सप्लायर कौन है? और अगर विभाग को सब पता है, तो फिर ‘मेन माफिया’ अब तक बाहर क्यों है?














