Breaking

नाबालिग बहनों के अपहरण और दुष्कर्म के दो मामलों में दोषी को उम्रकैद विशेष पॉक्सो न्यायालय भाटापारा का फैसला, दोनों प्रकरणों में आजीवन कारावास के साथ 20-20 वर्ष का कठोर कारावास और अर्थदंड

क्राइम 22 September 2026 (42)

post

प्रभात न्यूज़ 24: 

नाबालिग बहनों के अपहरण और दुष्कर्म के दो मामलों में दोषी को उम्रकैद

विशेष पॉक्सो न्यायालय भाटापारा का फैसला, दोनों प्रकरणों में आजीवन कारावास के साथ 20-20 वर्ष का कठोर कारावास और अर्थदंड



बलौदाबाजार-भाटापारा। नाबालिग बालिकाओं के अपहरण और यौन अपराध से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में विशेष पॉक्सो न्यायालय, भाटापारा ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त सनत साहू को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने दोनों प्रकरणों में अभियुक्त को आजीवन कारावास के साथ-साथ 20-20 वर्ष के कठोर कारावास सहित अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई है।



 दोनों मामलों में निर्धारित सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

पुलिस के अनुसार, यह मामला थाना सिमगा क्षेत्र से संबंधित है और दोनों प्रकरणों में पीड़िताएं नाबालिग बहनें हैं। पुलिस की ओर से की गई विवेचना, दस्तावेजी साक्ष्यों, मेडिकल एवं फोरेंसिक साक्ष्यों तथा अन्य प्रमाणों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अभियोजन की ओर से हुई पैरवी के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषसिद्ध किया।



वर्ष 2022 में सामने आया पहला मामला

पुलिस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, थाना सिमगा क्षेत्र में वर्ष 2022 में एक नाबालिग बालिका के गुम होने की सूचना दर्ज की गई थी। मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को बालिका को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दैहिक शोषण किए जाने से संबंधित तथ्य सामने आए। इसके आधार पर संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।



जांच के दौरान पुलिस ने बालिका की बरामदगी के साथ-साथ घटना से जुड़े विभिन्न साक्ष्यों को एकत्र किया। मामले में अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो अधिनियम तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।



अगस्त 2024 में सामने आया दूसरा प्रकरण

पुलिस के मुताबिक, पहले मामले के बाद अगस्त 2024 में इसी परिवार की दूसरी नाबालिग बालिका से संबंधित एक और मामला सामने आया। आरोप था कि अभियुक्त उसे भी झांसे में लेकर अन्यत्र ले गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। दोनों प्रकरणों में पीड़िताओं के नाबालिग होने के कारण पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान लागू हुए। पुलिस के अनुसार, पीड़िताओं के अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित होने के कारण दोनों मामलों में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं।



महाराष्ट्र तक चला पुलिस का सर्च ऑपरेशन

दोनों मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाबालिग बालिकाओं की सुरक्षित बरामदगी थी। पुलिस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तकनीकी साक्ष्यों, उपलब्ध सूचनाओं और मुखबिर तंत्र के आधार पर पुलिस टीमों ने महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में तलाश अभियान चलाया।

अंतर्राज्यीय स्तर पर चलाए गए इस अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर दबिश दी और दोनों नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित बरामद किया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।



पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तकनीकी जानकारी के साथ-साथ अंतर्राज्यीय समन्वय का भी उपयोग किया गया।

उम्र साबित करने में स्कूल रिकॉर्ड बना महत्वपूर्ण साक्ष्य

दोनों मामलों की न्यायिक प्रक्रिया में पीड़िताओं की आयु का निर्धारण महत्वपूर्ण बिंदु रहा। पुलिस ने विवेचना के दौरान संबंधित शैक्षणिक संस्थानों से उम्र से जुड़े दस्तावेज प्राप्त किए।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस विवेचकों ने स्कूल के मूल दाखिल-खारिज अथवा प्रवेश संबंधी रजिस्टर और शैक्षणिक प्रगति पत्रों को विधिवत जब्त कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष द्वारा इन दस्तावेजों को पीड़िताओं की आयु से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया।

नाबालिग होने की स्थिति पॉक्सो कानून के तहत मामले की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पुलिस द्वारा उम्र से संबंधित दस्तावेजों का संकलन विवेचना का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।



मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों को भी विवेचना में किया शामिल

पुलिस ने दोनों मामलों में चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक फोरेंसिक प्रक्रिया भी पूरी की। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पीड़िताओं की सहमति के अनुसार विधिवत डॉक्टरी मुलाहिजा कराया गया तथा आवश्यक स्लाइड/स्वाइब सहित अन्य साक्ष्य संकलित किए गए।



जांच एजेंसियों द्वारा ऐसे मामलों में घटनाक्रम से संबंधित उपलब्ध वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय साक्ष्यों को केस डायरी और अभियोग पत्र का हिस्सा बनाया जाता है। इस मामले में भी पुलिस ने उपलब्ध मेडिकल और फोरेंसिक साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।



समयबद्ध चार्जशीट और लगातार न्यायालयीन पैरवी

पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में विवेचना निर्धारित समयावधि में पूरी कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। पुलिस अधिकारियों और विवेचना टीम द्वारा दस्तावेजी, मेडिकल, तकनीकी तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुरूप प्रस्तुत किया गया।

प्रेस विज्ञप्ति में तत्कालीन थाना प्रभारी डीएसपी योगिता खापर्डे, तत्कालीन एसडीओपी ऐश्वर्य चंद्राकर, सहायक उप निरीक्षक एस.के. कुरैशी एवं पुलिस टीम की विवेचना में भूमिका का उल्लेख किया गया है।

अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक संजय बाजपेयी ने न्यायालय में प्रकरण की पैरवी की। पुलिस के अनुसार, विवेचना टीम और अभियोजन पक्ष के बीच समन्वय के माध्यम से प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।



दोनों मामलों में न्यायालय ने सुनाई अलग-अलग सजाएं

विशेष पॉक्सो न्यायालय भाटापारा के पीठासीन अधिकारी एवं अपर सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार जायसवाल की अदालत ने दोनों मामलों में अलग-अलग दंडादेश पारित किया।

पहला प्रकरण — विशेष प्रकरण क्रमांक 71/2024

यह मामला अपराध क्रमांक 443/2022, थाना सिमगा से संबंधित है। इसमें अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376(2)(n), पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(L)/6 तथा एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत दोषसिद्धि हुई।

न्यायालय ने एससी/एसटी अधिनियम के तहत आजीवन कारावास, पॉक्सो अधिनियम के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास, धारा 366 के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास और धारा 363 के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास सहित अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार ये सजाएं साथ-साथ चलेंगी।



दूसरा प्रकरण — विशेष प्रकरण क्रमांक 72/2024

दूसरा मामला अपराध क्रमांक 293/2024, थाना सिमगा से संबंधित है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 65(1), पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) तथा एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत दोषसिद्धि हुई।

इस मामले में भी न्यायालय ने एससी/एसटी अधिनियम के तहत आजीवन कारावास, पॉक्सो अधिनियम के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास, धारा 87 बीएनएस के तहत 5 वर्ष का कठोर कारावास तथा धारा 137(2) बीएनएस के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। इस मामले में भी सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।



पीड़िताओं को क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश

न्यायालय ने दोनों प्रकरणों में पीड़िताओं के पुनर्वास और सहायता से जुड़े पहलू को भी ध्यान में रखा है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), बलौदाबाजार को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत पीड़िताओं को क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने के लिए आदेशित किया गया है।

इस प्रकार न्यायालय के फैसले में दंड के साथ पीड़ित सहायता की प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है।



बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस की अपील

मामले में फैसला आने के बाद बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस ने अभिभावकों और आम नागरिकों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।

पुलिस ने कहा है कि बच्चों की गतिविधियों पर अभिभावक विशेष ध्यान रखें और किसी भी बच्चे के लापता होने अथवा संकट में होने की स्थिति में तत्काल नजदीकी पुलिस थाने अथवा डायल-112 पर सूचना दें।



पुलिस के अनुसार, महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित मामलों में सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक है, क्योंकि शुरुआती समय में प्राप्त जानकारी कई बार जांच और बरामदगी के लिए महत्वपूर्ण साबित होती है।

नाबालिग पीड़िताओं की पहचान उजागर करना प्रतिबंधित

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सावधानी नाबालिग पीड़िताओं की पहचान को लेकर है। पॉक्सो कानून और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत यौन अपराध से पीड़ित बच्चों की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है।

इसलिए समाचार में पीड़िताओं के नाम, फोटो, पता, स्कूल, परिवार अथवा ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए, जिससे उनकी पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर हो।

प्रभात न्यूज़ 24 की ओर से भी इस समाचार को जनजागरूकता और कानून की जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत करते हुए पीड़िताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी गई है।

You might also like!


RAIPUR WEATHER