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मोहतरा तिल्हापारा CC रोड पर Prabhat News 24 की ग्राउंड रिपोर्ट जनदर्शन में शिकायत के बाद भी जारी निर्माण, 4 अंगुल की CC रोड पर उठे सवाल Prabhat News 24 की ग्राउंड रिपोर्ट: निर्माण के दौरान ही सड़क की सतह उखड़ने का दावा, करीब 10 लाख की CC रोड की तकनीकी जांच की मांग

क्राइम 03 October 2026 (15)

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प्रभात न्यूज़ 24: 

मोहतरा तिल्हापारा CC रोड पर Prabhat News 24 की ग्राउंड रिपोर्ट

जनदर्शन में शिकायत के बाद भी जारी निर्माण, 4 अंगुल की CC रोड पर उठे सवाल

Prabhat News 24 की ग्राउंड रिपोर्ट: निर्माण के दौरान ही सड़क की सतह उखड़ने का दावा, करीब 10 लाख की CC रोड की तकनीकी जांच की मांग



बलौदाबाजार। 

ग्राम पंचायत मोहतरा के तिल्हापारा में निर्माणाधीन CC रोड को लेकर ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की ओर से गुणवत्ता एवं निर्माण मापदंडों से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं। Prabhat News 24 की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सामने आए शिकायतकर्ताओं के दावों के अनुसार, सड़क की निर्धारित मोटाई, निर्माण की गुणवत्ता, सड़क की बनावट और निर्माण प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों में असंतोष है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस संबंध में कलेक्टर जनदर्शन में भी शिकायत प्रस्तुत की गई है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने और मौके पर विस्तृत तकनीकी जांच नहीं होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, सड़क निर्माण में वास्तविक रूप से किसी तकनीकी कमी या अनियमितता की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसकी वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की तकनीकी जांच, स्वीकृत प्राक्कलन, Measurement Book (MB), Technical Specification और मौके की आधिकारिक माप के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।



करीब 200 मीटर CC रोड का निर्माण

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत मोहतरा के तिल्हापारा में दौलत साहू के घर से लोकु साहू के घर तक करीब 200 मीटर CC रोड का निर्माण कराया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार इस निर्माण कार्य के लिए जिला पंचायत मद से करीब 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई है। इसी राशि और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्य में आम लोगों को यह जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए कि सड़क की स्वीकृत लंबाई, चौड़ाई और मोटाई कितनी है, कार्य की अनुमानित लागत क्या है, निर्माण किस एजेंसी के माध्यम से कराया जा रहा है और कार्य के लिए कौन-कौन से तकनीकी मापदंड निर्धारित किए गए हैं।



चार अंगुल मोटाई होने का दावा, आधिकारिक माप की मांग

इस निर्माण कार्य को लेकर सबसे प्रमुख सवाल सड़क की मोटाई को लेकर उठाया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सड़क की मोटाई कई स्थानों पर करीब चार अंगुल यानी लगभग 3 से 4 इंच के आसपास दिखाई दे रही है।

लेकिन केवल देखकर सड़क की निर्धारित मोटाई पर अंतिम निष्कर्ष निकालना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा। इसी वजह से ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक मोटाई की विधिवत माप करें।

साथ ही उस माप को स्वीकृत Estimate और Technical Specification में निर्धारित मोटाई से मिलाया जाए।



यदि दोनों में अंतर पाया जाता है तो संबंधित विभाग द्वारा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

निर्माण के दौरान ही सतह उखड़ने का दावा

ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की ओर से सड़क की सतह को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

उनका दावा है कि निर्माण कार्य के दौरान अथवा निर्माण के बाद कुछ स्थानों पर सड़क की सतह से सामग्री उखड़ती हुई दिखाई दे रही है।

Prabhat News 24 की रिपोर्टिंग में इस संबंध में उठाए गए सवालों का मुख्य केंद्र यही है कि यदि सड़क अभी निर्माणाधीन है तो निर्माण पूरा होने से पहले ही उसकी गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण क्यों न कराया जाए।

कंक्रीट की गुणवत्ता, बेस की स्थिति, मिश्रण, क्योरिंग और निर्माण प्रक्रिया जैसे तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकता है कि सड़क निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार की जा रही है अथवा नहीं।



सड़क की बनावट और लेवल को लेकर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं ने सड़क की बनावट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कुछ हिस्सों में सड़क की लाइन और सतह समान दिखाई नहीं दे रही है।

हालांकि इस तरह के तकनीकी सवालों का अंतिम जवाब भी विभागीय माप और निरीक्षण के बाद ही मिल सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप बनाई जा रही है तो प्रशासन द्वारा कराई गई जांच से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

वहीं यदि किसी स्तर पर तकनीकी कमी पाई जाती है तो निर्माण पूरा होने से पहले सुधार की कार्रवाई संभव होगी।



जनदर्शन में शिकायत के बाद भी निर्माण जारी रहने पर सवाल

इस पूरे मामले में कलेक्टर जनदर्शन में की गई शिकायत को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने सड़क की गुणवत्ता और मोटाई से जुड़े सवालों को जिला प्रशासन के समक्ष रखा था।

इसके बाद भी निर्माण कार्य जारी रहने की स्थिति में ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि शिकायत के बाद संबंधित विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की गई और क्या निर्माण स्थल का तकनीकी निरीक्षण किया गया?

इस संबंध में प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच रिपोर्ट अथवा आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

इसलिए Prabhat News 24 की रिपोर्ट में किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने के बजाय मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच की आवश्यकता को प्रमुखता दी जा रही है।



MB में दर्ज माप और मौके की माप का हो मिलान

ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की Measurement Book यानी MB की जांच की मांग भी की है।

उनका कहना है कि मौके पर जितना कार्य वास्तव में हुआ है और सरकारी रिकॉर्ड में जितना कार्य दर्ज किया गया है, उसका मिलान होना चाहिए।

तकनीकी जांच के दौरान—

सड़क की वास्तविक लंबाई,

सड़क की चौड़ाई,

CC रोड की मोटाई,

कार्य की मात्रा,

MB में दर्ज माप,

स्वीकृत Estimate,

Technical Specification

का आपस में मिलान कराया जा सकता है।

यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में कोई अंतर मिलता है तो सक्षम अधिकारी उसके कारणों की जांच कर सकते हैं।



करीब 10 लाख रुपये की लागत को लेकर भी पारदर्शिता की मांग

ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण की लागत करीब 10 लाख रुपये बताई जा रही है।

ऐसे में शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर यह सार्वजनिक किया जाए कि—

कार्य किस योजना अथवा मद से स्वीकृत हुआ, स्वीकृत राशि कितनी है, सड़क की स्वीकृत लंबाई और चौड़ाई क्या है, निर्धारित मोटाई कितनी है तथा निर्माण की तकनीकी जिम्मेदारी किस स्तर पर है।

इन सवालों का जवाब संबंधित सरकारी दस्तावेजों से आसानी से स्पष्ट किया जा सकता है।



निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड की स्थिति पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं ने निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में आम नागरिकों को कार्य से जुड़ी मूलभूत जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।

यदि निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगाया गया है तो उसमें स्वीकृत राशि, योजना, कार्य की लंबाई, निर्माण एजेंसी, कार्य प्रारंभ होने की तिथि, पूर्णता की निर्धारित अवधि और अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध होने चाहिए।



ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन इस पहलू की भी जांच करे।

जांच निर्माण पूरा होने से पहले हो—ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों का सबसे महत्वपूर्ण आग्रह यह है कि तकनीकी जांच निर्माण पूरा होने से पहले कराई जाए।

उनका तर्क है कि निर्माणाधीन अवस्था में सड़क की वास्तविक मोटाई, बेस और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं को प्रत्यक्ष रूप से देखा और मापा जा सकता है।

यदि सड़क का निर्माण पूरा हो जाता है तो बाद में कई बिंदुओं की जांच अपेक्षाकृत कठिन हो सकती है।

इसलिए ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित तकनीकी अधिकारी मौके पर पहुंचें और निर्माण कार्य की स्थिति की जांच करें।



गुणवत्ता जांच में इन बिंदुओं पर हो सकता है परीक्षण

शिकायतकर्ताओं ने व्यापक तकनीकी जांच की मांग की है। उनके अनुसार जांच में मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं को देखा जाना चाहिए—

1. स्वीकृत सड़क की लंबाई और चौड़ाई।

2. CC रोड की स्वीकृत मोटाई।

3. मौके पर वास्तविक मोटाई।

4. सड़क की सतह और लेवल।

5. बेस की स्थिति।

6. निर्माण सामग्री की गुणवत्ता।

7. कंक्रीट मिश्रण और निर्माण प्रक्रिया।

8. क्योरिंग की स्थिति।

9. MB में दर्ज माप और मौके की माप।

10. स्वीकृत Estimate और वास्तविक कार्य का मिलान।

11. Technical Specification का पालन।

12. कार्यादेश एवं निर्माण एजेंसी से संबंधित रिकॉर्ड।

13. स्वीकृत राशि और कार्य की वास्तविक मात्रा।

14. निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड।

15. कार्य से संबंधित भुगतान अभिलेख।



ग्रामीणों का कहना—जांच से दूध का दूध, पानी का पानी

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं है। वे केवल यह चाहते हैं कि सार्वजनिक राशि से बन रही सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आए।

उनका कहना है कि यदि सड़क निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार बन रही है तो जांच के बाद यह बात स्पष्ट हो जाएगी।

वहीं यदि तकनीकी जांच में कोई कमी सामने आती है तो निर्माण पूरा होने से पहले सुधार कराया जा सकता है।

ग्रामीणों के मुताबिक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई का आधार केवल अधिकृत जांच रिपोर्ट और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड होना चाहिए।



प्रशासन से ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मुख्य रूप से निम्न मांगें रखी हैं—

पहली मांग: निर्माणाधीन CC रोड का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।

दूसरी मांग: सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई और मोटाई की मौके पर माप कराई जाए।

तीसरी मांग: मौके की माप को स्वीकृत Estimate एवं MB से मिलाया जाए।

चौथी मांग: निर्माण सामग्री और CC की गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण कराया जाए।

पांचवीं मांग: सड़क निर्माण की स्वीकृति, लागत और Technical Specification की जानकारी स्पष्ट की जाए।

छठी मांग: निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड की स्थिति की जांच की जाए।

सातवीं मांग: जांच पूरी होने तक नियमानुसार गुणवत्ता से संबंधित आवश्यक परीक्षण सुनिश्चित किए जाएं।

आठवीं मांग: यदि तकनीकी जांच में कोई कमी मिलती है तो नियमानुसार सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।



Prabhat News 24 की ग्राउंड रिपोर्ट का सवाल—जांच कब?

मोहतरा के तिल्हापारा की इस निर्माणाधीन सड़क को लेकर सबसे बड़ा सवाल फिलहाल किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि तकनीकी जांच होने का है।

यदि शिकायतकर्ताओं द्वारा उठाए गए सवाल सही नहीं हैं तो अधिकृत तकनीकी जांच के बाद स्थिति साफ हो जाएगी।

और यदि निर्माण कार्य में वास्तव में कोई तकनीकी कमी पाई जाती है तो निर्माण पूरा होने से पहले उसे सुधारा जा सकता है।

इसीलिए इस पूरे मामले में सबसे जरूरी कदम है—मौके की निष्पक्ष तकनीकी जांच और सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन।

ग्रामीणों की नजर अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है। क्या संबंधित विभाग की तकनीकी टीम मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक मोटाई, लंबाई, चौड़ाई, गुणवत्ता और निर्माण रिकॉर्ड का परीक्षण करेगी? क्या जनदर्शन में की गई शिकायत के बाद हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक होगी? और क्या निर्माण पूरा होने से पहले उठे सवालों का तकनीकी जवाब सामने आएगा?

इन सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच और संबंधित विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा।



Prabhat News 24 का पक्ष

Prabhat News 24 किसी व्यक्ति, अधिकारी, कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि, निर्माण एजेंसी या अन्य संस्था पर कोई आरोप नहीं लगा रहा है। यह समाचार ग्रामीणों एवं शिकायतकर्ताओं द्वारा उठाए गए सवालों, उपलब्ध जानकारी और तकनीकी जांच की मांग पर आधारित है। सड़क निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष सक्षम विभाग की तकनीकी जांच, सरकारी अभिलेखों और अधिकृत रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जा सकता है। समाचार का उद्देश्य सार्वजनिक निर्माण कार्य में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जनहित से जुड़े सवालों को प्रशासन के संज्ञान में लाना है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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